
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Updated : April 16, 2025 1:19 PM IST
Hirschsprung's Disease In 2 Year Old Boy: कब्ज की शिकायत बड़ों की तरह बच्चों में भी देखी जाती है। हालांकि, पुरानी कब्ज या क्रोनिक कॉन्स्टिपेशन की स्थिति बच्चों में कम ही देखी जाती है। हिर्शस्प्रंग एक रेयर कंडीशन है जो कुछ नवजात बच्चों में कभी-कभार देखने को मिल सकती है। यह एक ऐसी बीमारी है जिसमें बच्चों को साधारण तरीके से स्टूल पास कर पाने में परेशानी आती है और यह बीमारी आगे चलकर गम्भीर और कभी-कभी जानलेवा भी साबित हो सकती है। हाल ही में 2 साल के एक बच्चे में हिर्शस्प्रंग का एक ऐसा ही मामला सामने आया। जहां डॉक्टरों ने हिर्शस्प्रंग की दुर्लभ बीमारी से पीड़ित एक बच्चे की सर्जरी की। यह बच्चा जन्म के बाद से ही कब्ज से परेशान था और इसे साधारण तरीके से स्टूल पास करने में परेशानी होती थी। मिली जानकारी के अनुसार यह बच्चा पिछले 2 साल से गम्भीर कब्ज की समस्या से पीड़ित था। लेकिन अब सर्जरी के बाद बच्चा सामान्य जीवन जी रहा हैं। वहीं, इलाज के बाद बच्चे को पेट दर्द और अन्य लक्षणों से राहत मिली हैं।
डॉक्टरों द्वारा बताया गया कि, जन्म के एक महीने के बाद ही बच्चे में क्रोनिक कॉन्स्टिपेशनके लक्षण दिखायी देने लगे। बच्चे को 8-8 दिनों तक कब्ज रहती थी और वह स्टूल पास नहीं कर पाता था। नाशिक में कई डॉक्टरों ने बच्चे का इलाज करने की कोशिश की लेकिन बच्चे की सेहत में सुधार नही हो रहा था। उसका पेट अक्सर गैस से फूल जाता था, और उसका वजन बढ नही रहा था। बच्चे की बिगड़ती सेहत को देखकर माता-पिता बच्चे को मुंबई लेकर आए और यहां बच्चे की जांच करायी।
मुंबई के ग्लेनेईगल्स अस्पताल के पीडियाट्रिक गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. विभोर बोरकर (Dr. Vibhor Borkar,Pediatric Gastroenterology, Gleneagles Hospital in Mumbai ने बताया कि, “हिर्शस्प्रंग रोग तब होता है जब बड़ी आंत के निचले हिस्से में तंत्रिका कोशिकाएं (गैंग्लियन कोशिकाएं) विकसित नहीं हो पाती हैं। इससे स्टूल पास करने में रुकावट आने लगती है और क्रोनिक कॉन्स्टिपेशन की स्थिति बनने लगती है।
डॉ. बोरकर के अनुसार, 5 हजार या 10 हजार बच्चों में से किसी एक को यह बीमारी होती है। इस कंडीशन का को स्थायी इलाज नहीं है कई बार यह जानलेवा भी साबित हो सकता है। बहुत छोटे बच्चों में, पहली हरी पॉटी (मेकोनियम) का देर से निकलना एक प्रारंभिक संकेत हो सकता है। बड़े बच्चे आमतौर पर पेट में सूजन, उल्टी, वजन कम बढ़ना और लगातार कब्ज से पीड़ित होते हैं। ऐसी स्थिती में सर्जरी की जरूरत होती है।
यह सर्जरी ओपेन हो सकती है या लेप्रोस्कोपिक, जहां आंत के प्रभावित हिस्से को हटाकर फिर से जोड़ा जाता है। हालांकि, इस बच्चे के मामले में, हमने पर-रेक्टल एंडोस्कोपिक मायोटॉमी (PREM) नामक एक न्यूनतम इनवेसिव तकनीक का उपयोग करके इलाज किया है। प्रक्रिया के बाद अब बच्चा स्टूल पास कर पा रहा है। बच्चे का समय रहते इलाज नही होता तो एंटरोकोलाइटिस, संक्रमण और मोटापा बढ़ने जैसी जटिलताएं हो सकती थी। डॉक्टर के अनुसार, यह एक जन्मजात स्थिति है, लेकिन प्रसवपूर्व निदान बेहद मुश्किल होता हैं और बच्चे में जन्म के बाद ही लक्षण दिखाई देने लगते हैं।
Disclaimer : प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।