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Written By: Yogita Yadav | Published : September 14, 2018 8:51 AM IST
मातृभाषा में सिद्धांतों की समझ जल्दी विकसित कर पाते हैं बच्चे। © Shutterstock
अपनी मातृभाषा में बात करने वाले बच्चे का जड़ों से तो जुड़ाव होता है ही, ऐसे बच्चे अक्लमंद भी होते हैं। यह बात एक अध्ययन में पता चली है। बाहर रहने वाले वैसे बच्चे जो घर में परिवार वालों के साथ मातृभाषा में बात करते हैं और बाहर दूसरी भाषा बोलते हैं, वह ज्यादा अक्लमंद होते हैं। एक नए अध्ययन से यह जानकारी मिली है।
शोध में हुअा साबित
ब्रिटेन के यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग के शोधकर्ताओं ने शोध में यह पाया कि वैसे बच्चे जो स्कूल में अलग भाषा बोलते हैं और परिवारवालों के साथ घर में अलग भाषा का इस्तेमाल करते हैं, उन्हें बुद्धिमत्ता जांच में उन बच्चों के मुकाबले अच्छे अंक आए जो सिर्फ गैर-मातृभाषा जानते हैं।
इस अध्ययन में ब्रिटेन में रहनेवाले तुर्की के सात से 11 साल के 100 बच्चों को शामिल किया गया। इस आईक्यू जांच में दो भाषा बोलने वाले बच्चों का मुकाबला ऐसे बच्चों के साथ किया गया जो सिर्फ अंग्रेजी बोलते हैं।
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मातृभाषा में सीखना होता है आसान
यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. माइकल डैलर जिन्होंने इस अध्ययन का नेतृत्व किया का कहना है कि छोटी उम्र में बच्चों के अंदर मातृ भाषा में सिद्धांतों को विकसित करना ज्यादा आसान है और उसके बाद उसी के लिए किसी दूसरी भाषा में नया शब्द आसानी से सीखा जा सकता है।
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मुश्किल होती है अनजानी भाषा
वैसे बच्चे जिन्हें पहली ही बार किसी अनजानी भाषा में कोई नई बात सिखाई जाती है, उनके लिए उस चीज को सीखना और समझना बहुत मुश्किल होता है और ऐसे बच्चों का आईक्यू भी कमजोर होता है। हमारी रिसर्च के नतीजे बताते हैं कि अभिभावक घर पर बच्चों को मातृभाषा में बोलने के लिए प्रोत्साहित करें और मातृभाषा में ही बच्चों को नई-नई चीजें सिखाकर उनकी बुद्धिमत्ता का विकास कर सकते हैं। ऐसा इसलिए भी क्योंकि द्विभाषिक होना मस्तिष्क पर सकारात्मक असर डालता है।