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Written By: akhilesh dwivedi | Updated : February 2, 2019 5:24 PM IST
हिमाचल में स्वाइन फ्लू का प्रकोप ज्यादा न बढ़े इसके लिए आज मुख्यमंत्री जी ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की और कहा कि स्वाइन फ्लू के प्रति जागरूकता संदेश एवं विज्ञापन जारी किए जा रहे हैं। @CMOFFICEHP
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने शनिवार को राज्य में स्वाइन फ्लू से निपटने के लिए उठाए जा रहे कदमों के बारे में जायजा लिया। इस बीमारी के चलते राज्य में 10 लोगों की मौत हो चुकी है।
ठाकुर ने यहां एक बैठक में अधिकारियों से कहा कि बीमारी के बारे में लोगों को जागरूक किया जाना चाहिए ताकि समय पर इलाज मुहैया कराया जा सके। उन्होंने कहा कि विशेष मेडिकल टीम को उन क्षेत्रों में तैनात किया जाना चाहिए जहां अधिकतम मामले पाए गए हैं।
मुख्यमंत्री को बताया गया कि यहां 'इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल' में इस बीमारी के मरीजों के लिए 12 बेड वाला एक अलग वार्ड बनाया गया है और चार बेड वाला एक और गहन चिकित्सा विभाग बनाया गया है ताकि बीमारी से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।
हिमाचल में स्वाइन फ्लू का प्रकोप ज्यादा न बढ़े इसके लिए आज मुख्यमंत्री जी ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की और कहा कि स्वाइन फ्लू के प्रति जागरूकता संदेश एवं विज्ञापन जारी किए जा रहे हैं। प्रदेशवासियों से अपील है कि स्वाइन फ्लू के मद्देनजर सावधानी बरतें। pic.twitter.com/SWYiUiuh3Z
— CMO HIMACHAL (@CMOFFICEHP) February 2, 2019
कुल 270 परीक्षणों में से 86 में स्वाइन फ्लू के लक्षण पाए गए।
स्वाइन फ्लू के लक्षण
अगर किसी व्यक्ति को खांसी, गले में दर्द, बुखार, सिरदर्द, मतली और उल्टी के लक्षण हैं, तो स्वाइन फ्लू की जांच करानी चाहिए। इस स्थिति में दवाई केवल चिकित्सक की निगरानी में ही ली जानी चाहिए।
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क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स
हार्ट केयर फाउंडेशन (एचसीएफआई) के अध्यक्ष डॉ. के.के. अग्रवाल बताते हैं कि, “स्वाइन फ्लू में खांसी या गले में खरास के साथ 1000 फारेनहाइट से अधिक तक बुखार हो सकता है। निदान की पुष्टि आरआरटी या पीसीआर तकनीक से किए गए लैब टैस्ट से होती है।”
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डॉ. अग्रवाल के अनुसार, “हल्का फ्लू या स्वाइन फ्लू बुखार, खांसी, गले में खरास, नाक बहने, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द, ठंड और कभी-कभी दस्त और उल्टी के साथ आता है। हल्के मामलों में, सांस लेने में परेशानी नहीं होती है। लगातार बढ़ने वाले स्वाइन फ्लू में छाती में दर्द के साथ उपरोक्त लक्षण, श्वसन दर में वृद्धि, रक्त में ऑक्सीजन की कमी, कम रक्तचाप, भ्रम, बदलती मानसिक स्थिति, गंभीर निर्जलीकरण और अंतर्निहित अस्थमा, गुर्दे की विफलता, मधुमेह, दिल की विफलता, एंजाइना या सीओपीडी हो सकता है।”
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गर्भवती महिलाओं को ज्यादा खतरा
डॉ. अग्रवाल बताते हैं कि गर्भवती महिलाओं में, फ्लू भ्रूण की मौत सहित अधिक गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है। हल्के-फुल्के मामलों में अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन गंभीर लक्षण होने पर मरीज को भर्ती करने की आवश्यकता हो सकती है।
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संक्रमण का मुख्य कारण
गौरतलब है कि स्वाइन फ्लू इन्फ्लूएंजा-ए वायरस के एक स्ट्रेन के कारण होती है और सुअरों से इंसानों में संचरित होती है। समय पर इलाज नहीं होने पर एच1एन1 घातक भी हो सकता है।
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