
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Updated : June 6, 2021 10:28 AM IST
Delta Variant: कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर (Second wave of coronavirus) के खत्म होने के संकेत दे दिए गए हैं। लेकिन, देश में इस लहर का असर बहुत अधिक व्यापक स्तर पर देखा गया। पहली लहर की तुलना में कहीं अधिक संक्रामक और घातक साबित हुई सेकेंड वेव के दौरान देश में लाखों लोगों की असमय मृत्यु हो गयी। वहीं, लगातार हो रहे म्यूटेशन (mutation) के कारण इस वायरस ने लोगों की मुश्किलें और भी बढ़ा दी है। हाल ही में बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी यानि बीएचयू (Banaras Hindu University) के वैज्ञानिकों के एक रिसर्च में चौंकानेवाली जानकारियां सामने आय़ी हैं। इस रिसर्च के अनुसार, उत्तर प्रदेश के बनारस यानि वाराणसी शहर में कोरोना वायरस के डेल्टा वेरियंट (Delta Variant) सर्वाधिक मामले मिले हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, कोरोना की सेकेंड वेव ने ज़ोर पकड़ना शुरू किया, तब बीएचयू के वैज्ञानिकों ने 30 लोगों की एक विशेष टीम का गठन किया। इसके लिए सैम्पल्स इकट्ठा किए गए और उन सैम्प्ल का बाकायदा गहन अध्ययन शुरू किया गया। वाराणसी (Varanasi) के साथ-साथ आस-पास मिर्ज़ापुर (Mirzapur) और अन्य जिलों से भी सैम्पल्स इकट्ठा किए गए। स्टडी के दौरान 130 सैम्पल्स की जीनोम सीक्वेंसिंग की गयी। इस रिसर्च के दौरान B.1.351 का भी म्यूटेंट मिला, जिसे सबसे पहले दक्षिण अफ्रीका (South Africa) में पाया गया था। इन आंकड़ों की मदद से वैज्ञानिक थर्ड वेव के प्रभाव का भी अनुमान लगाने के प्रयास कर रहे हैं।
बता दें कि, इस रिसर्च का आयोजन बीएचयू ने सीएसआईआर सेल्युलर (CSIR) और सीसीएमबी हैदराबाद (Centre for Cellular and Molecular Biology, Hyderabad )के साथ किया। रिसर्च के दौरान, वाराणसी शहर और आस-पास के इलाकों में कोरोना वायरस वैरिएंट की जीनोम सीक्वेंसिंग की गयी। जिसके बाद सामने आए परिणाम दर्शाते हैं कि शहर में डेल्टा वैरिएंट सबसे अधिक पाए गए। इन जानकारियों के आधार पर अब कोरोना के इस खतरनाक स्ट्रेन पर रिसर्च की जा रही है। वैज्ञानिकों ने यह भी कहा है कि जल्द ही इस दिशा में उन्हें सफलता भी मिलेगी और इस स्ट्रेन को कंट्रोल कर पाना भी संभव होगा।
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