Cholesterol Levels: एशियाई लोगों में बढ़ रहा है कोलेस्ट्रॉल लेवल, दिल की बीमारियों का रिस्क भी ज़्यादा

बैड कोलेस्ट्रॉल कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों का रिस्क बढ़ा देता है। हाल ही में एक स्टडी में बताया गया कि एशियाई मूल के लोगों में कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ता जा रहा है।  इस स्टडी के अनुसार, एशियाई क्षेत्र में रहने वाले लोगों में हाई-कोलेस्ट्रॉल के मामलों में अधिक तेज़ी देखी गयी। जबकि,  दूसरी तरफ पश्चिमी देशों में इसमें गिरावट देखी गयी। (High Cholesterol Levels in Asians)

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Written By: Sadhna Tiwari | Published : June 8, 2020 8:49 PM IST

High Cholesterol Levels :गुड कोलेस्ट्रॉल हमारे दिल की सेहत के लिए अच्छा माना जाता है। जबकि, बैड कोलेस्ट्रॉल कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों का रिस्क बढ़ा देता है। हाल ही में एक स्टडी में बताया गया कि एशियाई मूल के लोगों में कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ता जा रहा है।  इस स्टडी के अनुसार, एशियाई क्षेत्र में रहने वाले लोगों में हाई-कोलेस्ट्रॉल के मामलों में अधिक तेज़ी देखी गयी। जबकि,  दूसरी तरफ पश्चिमी देशों में इसमें गिरावट देखी गयी। (High Cholesterol Levels in Asians)

एक ताज़ा प्रकाशित रिसर्च पेपर में दुनियाभर में लोगों के शरीर कोलेस्ट्रॉल के स्तर को समझने की कोशिश की गयी है और इससे जुड़े विभिन्न खुलासे किए गए हैं।  इम्पीरियल कॉलेज, लंदन के नेतृत्व में आयोजित इस रिसर्च के परिणाम प्रसिद्ध वैज्ञानिक जर्नल, 'नेचर' में छापे गए। इस रिसर्च पेपर का शीर्षक था-, ' ‘Repositioning of the global epicentre of non-optimal cholesterol, यह  इस प्रकार की सबसे बड़ी स्टडी है। जिसमें, सैकड़ों रिसर्चर्स ने योगदान दिया। विभिन्न स्टडीज़ और रिसर्च के आधार पर उपलब्ध डेटा से यह पता चलता है कि, दुनिया भर में लगभग 3.9 मिलियन लोगों की मृत्यु हाई कोलेस्ट्रॉल की वजह से हो जाती है। (High Cholesterol Risk in Indians):

क्या है गुड कोलेस्ट्रॉल और बैड कोलेस्ट्रॉल का अंतर? (Good Cholesterol and Bad Cholesterol)

हाई डेंसिटी वाले लिपोप्रोटीन या एचडीएल को गुड कोलेस्ट्रॉल कहा जाता है। यह हमारी रक्त धमनियों में ब्लॉकेज को दूर करने का काम करता है। यह बैड कोलेस्ट्रॉल का स्तर भी कम करता है। लेकिन, दूसरी ओर लो डेंसिटी लिपोप्रोटीन या एलडीएल, बैड कोलेस्ट्रॉल है। धमनियों में इसकी मात्रा अधिक होने से रक्त का प्रवाह प्रभावित हो सकता है। क्योंकि, इससे, धमनियों में ब्लॉकेज आ जाती है। ब्लड सर्कुलेशन मे यह रूकावट कार्डिएक अरेस्ट और अन्य कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों का खतरा बढ़ा देती है। इसका मतलब है कि, बॉडी में बैड कोलेस्ट्रॉल लेवल जितना हाई होगा। हार्ट अटैक का डर उतना ही अधिक होगा।

क्या कहती है रिसर्च?

इस रिसर्च के लिए 102.6 मिलियन व्यक्तियों के डेटा का उपयोग किया गया और 1980 से 2018 तक 39-वर्ष की समयावधि में 200 देशों में कोलेस्ट्रॉल के स्तर की जांच की गई। इस स्टडी में एशिया और खासकर भारत के लोगों के बारे में इस तरह के खुलासे किए गए-

  • भारतीय पुरुषों में नॉन-एचडीएल (उच्च घनत्व वाले लिपोप्रोटीन) कोलेस्ट्रॉल 1980 में 128 वें स्थान पर रहा और 2018 में भी ऐसा ही रहा।
  • महिलाओं के मामले में रैंक वैश्विक स्तर पर 139 वें से 140 वें स्थान पर मामूली रूप से बढ़ी'।
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