... Read More
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts. Cookie Policy.
Written By: Agencies | Published : October 30, 2014 2:33 PM IST
पानी कम पीने की आदत और काम के तनाव से युवा दिमाग की बीमारी से ग्रस्त हो रहे हैं। पांच वर्ष पहले तक 50 साल से ज्यादा उम्र के व्यक्तियों को होने वाला मस्तिष्काघात अब 35 वर्ष तक के युवाओं को भी अपनी चपेट में ले रहा है। मस्तिष्काघात के मरीजों में युवाओं की संख्या बढ़ती जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि बदलती जीवनशैली और नियमित व्यायाम न करना मस्तिष्काघात का मुख्य कारण है।
डा़ राम मनोहर लोहिया संस्थान के न्यूरोलजी विभाग के चिकित्सक दिनकर कुलश्रेष्ठ ने बताया कि मस्तिष्काघात में दिमाग की नसों में खून का थक्का बन जाता है। कुलश्रेष्ठ बताते हैं, 'आघात के तीन घंटे के भीतर मरीज का इलाज शुरू हो जाए तो दवाओं से थक्का खत्म किया जा सकता है। देरी होने पर मरीज को ठीक होने में ज्यादा समय लगता है।' चिकित्सकों के मुताबिक, हाथ-पैरों में सनसनाहट, दोनों हाथों से सामान उठाते समय पकड़ कमजोर होना, बात करते समय जुबान का लडखड़ाना, चलते समय शरीर कंपकंपाना और मुंह में टेढ़ापन इस बीमारी के मुख्य लक्षण हैं। इधर, राजधानी स्थित बलरामपुर अस्पताल के न्यूरो सर्जन डॉ. रघुवीर के मुताबक गर्मियों में युवाओं को मस्तिष्काघात का खतरा ज्यादा होता है। यह आघात युवाओं को दिमाग से हृदय तक खून पहुंचाने वाली रक्त वाहिका में खून का थक्का जमने के कारण होता है।
रघुवीर कहते हैं कि इसकी वजह शरीर में पानी की कमी का होना है। जो लोग कम पानी पीते हैं और ज्यादा तनाव में रहते हैं, उन्हें इसका जोखिम ज्यादा होता है। बुजुर्गो में मस्तिष्काघात का खतरा सर्दियों के समय अधिक रहता है।
स्रोत: IANS Hindi
चित्र स्रोत: Getty images
लेटेस्ट अप्डेट्स के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो कीजिए।स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के लिए न्यूजलेटर पर साइन-अप कीजिए।