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क्या अब भी पवित्र है यमुना नदी?

एम्स ने यमुना नदी के जल के सैम्पल में केमिकल और एन्टीबायोटिक पाया!

क्या अब भी पवित्र है यमुना नदी?

Written by Agencies |Updated : April 19, 2017 12:17 PM IST

सदियों से भारतीय गंगा-यमुना नदी को धार्मिक और पवित्र नदी मानते आए हैं। यमुना के तट पर तो कृष्ण का वास माना जाता है लेकिन क्या अब भी यमुना पहले की तरह ही पवित्र रह गई है हमारे लिए? नहीं, यमुना और गंगा में बढ़ता जल प्रदूषण पानी को विषाक्त करता जा रहा है, जो लोगों के जीवन को संशय में डाल रहा है।

हाल ही में जी न्यूज़ के रिपोर्ट के अनुसार एम्स ने अनुसंधान के दौरान पानी के सैम्पल की जांच करने पर उसमें केमिकल और एन्टीबायोटिक पाया है। और इनमें विशेष रूप से घरेलू फ्लोर क्लीनर के तत्वों मिले हैं, साथ ही लोग जितने भी घर के अवांछित चीजें होती हैं उनको नाली या ड्रेन में फेंक देते हैं जो यमुना और गंगा में जाकर गिरता है। ये ही अवांछित तत्व पानी को विषाक्त बना देते हैं जिससे जल के प्राणी और वनस्पति का जीवन दिन पर दिन खतरे में पड़ता जा रहा है। इस न्यूज़ ने और ज्यादा लोगों को भयभीत कर दिया क्योंकि डबल्यू. एच. ओ. (WHO) ने हाल ही में पूरे विश्व में एन्टीबायोटिक रीज़िस्टन्स की मात्रा बढ़ रही है।

अध्ययन के अनुसार छह विभिन्न जगहों से यानि वजीराबाद  और  कालिन्दी कुंज के बीच यमुना नदी से पानी  का सैंपल लिया गया है। डॉ. वेल पेनडियन, प्रोफेसर इन द फार्माकलॉजी डिपार्टमेंट ऑफ प्रीमियर इ्ंस्चट्चयूट (Dr Vel Pandian, professor in the Pharmacology Department of the premier institute) के अनुसार तीन तरह के एन्टीबायोटिक्स होते हैं, फ्लूरोक्वीनोलोन (Fluoroquinolone) श्वसन और यूरीनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन के इलाज के लिए, मैक्रोलिड्स और पेनीसीलीन निमोनिया, फीवर, रीयूमैटिक फीवर जैसे बैक्टिरीयल इंफेक्शन के इलाज के काम आता है। उन्होंने व्याख्या किया है कि सारे पानी के सैंपल्स में ये सारे प्रकार के एन्टीबायोटिक मिले है। हो सकता है जिसके कारण भविष्य में एन्टीबायोटिक थेरपी काम करना बंद कर दें।

उनका कहना है कि ड्रग रीज़िस्टन्स माइक्रोब्स शरीर में कई तरीकों से एन्टर करते हैं, जैसे- यमुना के पानी से साग-सब्जी उगाया जाता है या उसको धोया जाता है। इस तरीके से भी ये माइक्रोब्स शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। और इसी कारण अक्सर कोई भी इन्फेक्शन होने पर शरीर पर दवाईयों का असर नहीं हो पाता है।

डॉ. पेनडियन के अनुसार एन्टीबायोटिक जल में मानव मल-मूत्र और नाली के द्वारा जाता है जो नाली से होकर नदी में जाकर गिरता है। यहां तक कि लोग जो दवाएं नाली में फेंकते हैं वे भी यमुना के जल को दूषित करते हैं।

इसलिए खुद में जागरूकता लायें नहीं तो डाइबीटिक और कैंसर रोग के बढ़ते खतरे को कम नहीं कर पायेंगे।

 मूल स्रोत- Yamuna river–Holy or not?? AIIMS finds antibiotics in water samples

चित्र स्रोत - Shutterstock

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