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विश्व आयुर्वेद कांग्रेस: औषधीय पौधों एवं जड़ी-बूटियों का संरक्षण ज़रूरी

विश्व आयुर्वेद कांग्रेस: औषधीय पौधों एवं जड़ी-बूटियों का संरक्षण ज़रूरी

Written by Agencies |Updated : July 24, 2015 11:45 AM IST

राष्ट्रीय राजधानी के प्रगति मैदान में चल रही छठी विश्व आयुर्वेद कांग्रेस के तहत आयोजित सम्मेलन में विशेषज्ञों ने वन विभाग के अधिकारियों को औषधीय पौधों एवं जड़ी-बूटियों के संरक्षण के प्रति संवेदनशील और जागरूक बनाने की जरूरत पर जोर दिया। राष्ट्रीय मेडिसिनल प्लांट्स बोर्ड की ओर से औषधीय पौधों के वन विभाग के साथ एकीकरण विषय पर आयोजित दो दिन के अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में औषधीय वनस्पति विशेषज्ञों ने कहा कि देश में एक ऐसी व्यवस्था कायम की जानी चाहिए, जिससे औषधीय पौधों की पैदावार करने वाले तथा वन अधिकारी एक दूसरे के साथ मिलकर काम करें, ताकि देश की स्वदेशी चिकित्सा प्रणालियों का तेजी से विकास हो।

उन्होंने कहा कि ऐसी व्यवस्था तभी कायम हो सकती है जब प्रशासनिक एवं वन अधिकारी यह ध्यान रखें कि औषधीय पौधों एवं जड़ी-बूटियों का मुख्यस्रोत जंगल ही है। देश की 90 प्रतिशत औषधीय वनस्पतियां एवं जड़ी-बूटियां जंगलों में उगने वाले पौधों से ही प्राप्त होते हैं। भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत कार्यरत आयुष विभाग के सचिव निलांजन सान्याल ने कहा कि राष्ट्रीय आयुष मिशन के कार्यो को मंत्रालय के तहत कार्य करने वाले आयुष विभाग के साथ एकीकरण करने से देश को व्यापक लाभ हो सकता है। सान्याल ने कहा, 'हमें जड़ी-बूटियों की गुणवत्ता को कायम रखनी चाहिए और उनका मानकीकरण करना चाहिए, ताकि ये औषधीय पौधे चिकित्सका के सामान्य कायदों के अनुकूल साबित हो सकें।'

नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल के साथ तकनीकी सदस्य के रूप में काम करने वाले बी.एस. साजवान ने कहा कि देश के सभी वन अधिकारियों एवं कर्मचारियों को औषधीय पौधों को देश राष्ट्रीय संसाधन के प्रमुख हिस्से के रूप में समझना चाहिए। एक तरह जहां जैव विविधता को संरक्षित रखना जरूरी है, वहीं औषधीय पौधों को संरक्षित किया जाना भी जरूरी है। नेशनल मेडिसिनल प्लांट्स बोर्ड (एनएमपीबी) के पूर्व प्रमुख साजवान ने कहा कि हाल के एक अध्ययन से पता चला है कि औषधीय वनस्पतियों की कम से कम 178 किस्मों का उपचार कार्यों में व्यापक पैमाने पर इस्तेमाल होता है और इस तरह औषधीय पौधे व्यावासिक उद्देश्यों के लिए भी हो सकता है। उन्होंने वन विभाग के अधिकारियों से जड़ी बूटियों की पैदावार को बढ़ावा देने के लिए अपने स्तर पर कार्यक्रम चलाने का भी आह्वान किया। इसके अलावा हर्बल मंडियों में से बिचौलियों की भूमिका को कम करने की जरूरत पर भी बल दिया।

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बेंगलुरू स्थित फाउंडेशन ऑफ रिवाटलाइजेशन ऑफ लोकल हेल्थ ट्राजिशंस के डॉ. आर.के. वेद ने कहा कि वनों में पांच हजार से लेकर छह हजार 560 आयुर्वेदिक पौधों से अधिक पौधे पाए जाते हैं। एनएमपीबी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जितेंद्र शर्मा ने कहा कि बोर्ड वनों में पाए जाने वाले औषधीय वनस्पतियों के संरक्षण तथा पौधे उत्पादकों द्वारा औषधीय पौधों की पैदावार को बढ़ावा देने के अपने ऐजेंडे को क्रियान्वित करेगा। सम्मेलन को एनएमपीबी की उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी मीनाक्षी नेगी ने भी संबोधित किया। तकनीकी सत्र में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान की डॉ. रमा जयासुंदर ने औषधीय पौधों के स्पेक्टरोस्कोपिक विश्लेषण पर अपना शोधपत्र पेश किया।

स्रोत: IANS Hindi

चित्र स्रोत: Getty images


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