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Written By: Agencies | Updated : February 3, 2016 11:48 AM IST
हृदयाचे स्वास्थ्य सुधारण्यासोबतच वजन कमी करण्यास देखील कलिंगड मदत करते. तसेच धमन्यांमध्ये मेद साचून राहण्यापासुन कलिंगड परिवृत्त करते.
जंगली खीरा, कद्दू, खरबूज, और तरबूज कड़वा होते हैं और ये कैंसर व मधुमेह के उपचार में सहायक हो सकते हैं। इन फलों की कड़वाहट में मौजूद क्यूकरबिटासिन नाम के घटक हिंसक जानवरों से जंगली पौधों की रक्षा करते हैं। इनमें कैंसर की कोशिकाओं का विकास रोकने की क्षमता होती है। पढ़े: मधुमेह के रोगी कौन-से फल खा सकते हैं?
जंगली खीरे और उसकी पत्तियां बीमार जिगर के उपचार के लिए हजारों वर्षो से भारतीय और चीनी दवाओं में इस्तेमाल की जाती रही हैं। डेविस स्थित कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में प्लांट बायोलॉजी के प्रोफेसर और अध्ययन के सह-लेखक विलियम लुकास ने बताया, 'लोग जब तक रक्त का शोधन नहीं चाहते, तब तक जंगली ककड़ी नहीं खाते।' शोधकर्ताओं ने पाया कि जंगली खीरे के तीव्र तीखे स्वाद के लिए जीन जिम्मेदार होते हैं। पढ़े: मधुमेह से राहत पाने के लिए कड़ी पत्ता को अपने आहार (डाइट) में शामिल कीजिए
उन्होंने कड़वाहट के कारण डीएनए में होने वाले बदलावों को जानने के लिए डीएनए अनुक्रमण की नई प्रौद्योगिकी का प्रयोग किया। शोधकर्ता क्यूकरबिटासिन बनाने में शामिल नौ जीनों को पता लगाने में सफल हुए। उन्होंने बताया कि इस लक्षण से दो प्रतिलेखन कारकों का पता लगाया जा सकता है, जो फलों और पत्तियों में क्यूकरबिटासनि बनाने के लिए इन नौ जीनों को सक्रिय करते हैं। पढ़े: स्तन कैंसर: कारण, लक्षण और बचाव
यह अध्ययन 'साइंस' जर्नल में प्रकाशित हुआ है।
स्रोत: IANS Hindi
चित्र स्रोत: Getty images
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