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Written By: Agencies | Published : October 31, 2014 11:47 AM IST
राजस्थान में चलाए जा रहे टीकाकरण पर दो दिवसीय राज्यस्तरीय कार्यशाला यहां गुरुवार को शुरू हुई। राज्य प्रतिनिधि वरुण शर्मा ने कहा कि प्रदेश में टीकाकरण की प्रभावी निगरानी में स्वंयसेवी संस्थाओं व मीडिया की अहम भूमिका है। होटल पीपरमेंट में आयोजित कार्यशाला में एलायंस फॉर इम्युनाइजेशन इन इंडिया (एआईआई) तथा गेवी (ग्लोबल एलायंस फॉर इम्युनाइजेशन) के राज्य प्रतिनिधि वरुण शर्मा ने कहा कि आज भी ग्राम स्तर पर स्वास्थ्य के मुद्दों पर सरकार पूरी तरह से गंभीर नहीं है। सरकारी चिकित्सा सेवाओं का प्रभावी निगरानी न होने के कारण टीकाकरण जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं सफल नहीं हो पा रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में टीकाकरण की प्रभावी निगरानी में स्वंयसेवी संस्थाओं व मीडिया की अहम भूमिका है। प्रदेश ही नहीं, सूचे देश में स्वंयसेवी संस्थाएं विभिन्न मुद्दों पर काम रही हैं।शर्मा ने कहा कि कि ग्राम व ढाणी स्तर पर नियमित रूप से होने वाले टीकाकरण के लिए पारंपरिक तरीकों, धार्मिक व अन्य संस्थाओं के माध्यम से जागरूकता लाई जानी चाहिए और ग्रामीणों की मदद के लिए इस कार्यक्रम को गति दी जानी चाहिए।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार आरती धार ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र के चिकित्सा संबधी जो मुद्दे हैं, उन्हें मीडिया में लाकर उस मुद्दे पर सरकार का ध्यान आकर्षित कर इन सुविधाओं का प्रभावी क्रियान्वयन हो सकता है।उन्होंने कहा कि सरकारी स्तर पर विभिन्न योजनाओं की कार्ययोजना बनाने में बहुत सारी कमियां रह जाती हैं, जिसे स्वयंसेवी संस्थाओं व मीडिया के माध्यम से दूर किया जा सकता है। इसके साथ ही सरकार व स्वंससेवी संस्थाओं को मौजूदा समस्याओं के समाधान निकालने पर ध्यान करने की जरूरत है और उस समाधान को मीडिया में लाने से वह दूसरों के लिए प्रेरणास्रोत बन सकता है।राजस्थान वालंटियरी हेल्थ एसोसिएशन के परियोजना निदेशक व संयुक्त सचिव विक्रम सिंह राघव ने कहा कि राजस्थान में टीकाकरण कार्यक्रम के सुदृढ़ीकरण के लिए गावी के सहयोग से राज्यस्तरीय स्वैच्छिक संगठन नेटवर्क की स्थापना इस वर्ष 18 जून को की गई थी, जिसमें प्रदेश के 60 संस्थान सदस्य हैं। उन्होंने कहा कि ये संस्थान टीकाकरण कार्यक्रम को प्रभावी बनाने के लिए काम करेंगे। इन संस्थाओं व मीडिया के सहयोग से ग्राम स्तर पर चिकित्सा सेवाआंे को और अधिक बेहतर बनाने के लिए एक पहल की गई है।
राघव ने कहा कि 1990 में टीकाकरण में 6 टीके लगाए जाते थे और इसी दौरान इनकी माइक्रो प्लानिंग भी शुरू हुई, जिसके तहत सूक्ष्म रूप से बीमारियों के टीकाकरण की प्लानिंग हुई। टीकाकरण के लिए समुदाय, स्थानीय नागरिक, संस्था, धार्मिक संस्थानों की अहम भूमिका हो सकती है। कार्यशाला में प्रदेशभर से आए 45 संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। प्रतिनिधियों ने ग्राम व ढाणी स्तर पर टीकाकरण सही तरीके से हो, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग को चाहिए कि वह एएनएम को पाबंद करे। उन्होंने कहा कि एएनएम, आशा व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता का आपसी सामजंस्य न होने के कारण भी टीकाकरण व अन्य स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। एआईआई, नई दिल्ली की मीना ने कहा कि विश्व में 2.2 लाख बच्चे प्रतिवर्ष आधारभूत टीके से वंचित रह जाते हैं। ऐसी स्थिति में, टीकाकरण स्तर को आच्छादित करने के लिए स्वास्थ्य तंत्र को सशक्त करने की जरूरत है। पढ़े: राजस्थान में दो दिवसीय टीकाकरण कार्यशाला का आयोजन
स्रोत: IANS Hindi
चित्र स्रोत: Getty images
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