Don’t Miss Out on the Latest Updates.
Subscribe to Our Newsletter Today!
- लेटेस्ट
- डिज़ीज़
- डाइट
- फिटनेस
- ब्यूटी
- घरेलू नुस्खे
- वीडियो
- पुरुष स्वास्थ्य
- मेंटल हेल्थ
- सेक्सुअल हेल्थ
- फोटो स्टोरी
- आयुष
- पेरेंटिंग
- न्यूज
स्वाइन फ्लू के उपचार में यज्ञोपैथी सहायक हो सकती है। यज्ञ में चूंकि औषधीय प्रयोग होता है, अत: वातावरण के साथ-साथ यज्ञकर्ताओं को भी लाभ पहुंचता है। यज्ञ से वायु शुद्ध होकर ताजा शुद्ध ऑक्सीजन की प्राप्ति होती है जिससे स्वास्थ्य अच्छा रहता है। यह कहना है हरिद्वार स्थित देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. प्रणव पण्ड्या का।
प्रणव पण्ड्या ने रविवार को यहां विवि के समग्र स्वास्थ्य प्रबन्धन केन्द्र के कर्मियों को संबोधित करते हुए स्वाइन फ्लू मुद्दे पर कहा, 'यज्ञ रोगोपचार में एक कारगर उपाय है। यज्ञ से नि:सृत औषधियुक्त धुएं में अद्भुत रोगनाशक शक्ति पाई गई है, जो यज्ञस्थलों के आस-पास के रोगाणुओं को नष्ट कर देती है। इसलिए स्वाइन फ्लू जैसी गम्भीर बीमारी में इस उपचार का सहारा लिया जाना चाहिए।' पढ़े- हर्बल चाय स्वाइन फ्लू के बीमारी से बचने में करता है मदद
डॉ. पण्ड्या ने ब्रह्मवर्चस् रिसर्च सेंटर में औषधीय सामग्रियों द्वारा हुए यज्ञीय प्रयोगों के नतीजों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यहां के शोध से पाया गया है कि औषधीय यज्ञ से वातावरण एवं मानवीय स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। यज्ञ से वायु शुद्ध होकर ताजा शुद्ध ऑक्सीजन की प्राप्ति होती है जिससे स्वास्थ्य अच्छा रहता है।
डॉ. पण्ड्या के मार्गदर्शन में विश्वविद्यालय में सतत शोध चलता रहता है कि मानव समाज को समग्र रूप से स्वस्थ, सबल, सुसंस्कृत और समुन्नत कैसे बनाया जाए? फिलहाल यहां स्वाइन फ्लू के आयुर्वेदिक, वैकल्पिक और प्राकृतिक उपचार पर शोध हो रहा है, जिसमें कई बचाव और उपचार के उपाय प्रस्तावित किए गए हैं, जिनमें औषधीय प्रयोग, आहार-विहार, पथ्यापथ्य सावधानी, साफ-सफाई आदि सहित यज्ञीय प्रयोग शामिल हैं।
यज्ञ विधा केवल धार्मिक क्रिया भर ही नहीं है बल्कि इससे वातावरण के परिष्कार के साथ-साथ उत्तम स्वास्थ्य की भी प्राप्ति होती है। यज्ञ का सम्बन्ध वातावरण और स्वास्थ्य दोनों से होने के कारण ही ऋषियों ने जन सामान्य में इसका प्रचलन किया है।
डॉ. पण्डया के अनुसार, 'किसी भी संक्रमण, साइड इफेक्ट्स या रोगाणुओं के संघातों से बचना हो तो सबसे पहले अपने स्वास्थ्य, खान-पान तथा दिनचर्या पर ध्यान देना होगा।'
अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. पण्ड्या के निर्देशन में देश के कई प्रभावित राज्यों, जैसे गुजरात, राजस्थान आदि के शक्तिपीठों में गायत्री परिजनों द्वारा स्वाइन फ्लू के दुष्प्रभावों से बचने हेतु प्राथमिक बचाव-उपचार के रूप में नि:शुल्क वनौषधीय क्वाथादि सेवन का व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने इसके लिए विश्वस्तर पर जन जागरूकता की आवश्यकता बताई और विश्व मानस से सहयोग की अपेक्षा की।
स्रोत: IANS Hindi
चित्र स्रोत: Getty images
हिन्दी के और आर्टिकल्स पढ़ने के लिए हमारा हिन्दी सेक्शन देखिए।लेटेस्ट अप्डेट्स के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो कीजिए।स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के लिए न्यूजलेटर पर साइन-अप कीजिए।