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Written By: Mousumi Dutta | Published : October 7, 2015 10:45 AM IST
उत्तर प्रदेश के पूर्वाचल क्षेत्र में इंसेफेलाइटिस का कहर थमने का नाम ही ले रहा है। गोरखपुर के बाबा राघवदास मेडिकल कालेज में इंसेफेलाइटिस से छह और बच्चों की मौत हो गई। इसके साथ ही इस बीमारी से मरने वालों की संख्या बढ़कर 266 हो गई। बताया जा रहा है कि इस साल एक जनवरी से अब तक इस मस्तिष्क ज्वर से पीड़ित 1227 रोगियों को भर्ती कराया गया, जिनमें से अब तक 266 की मौत हो चुकी है।
इस बीमारी से बाबा राघवदास मेडिकल कालेज में पड़ोसी देश नेपाल का एक, बिहार के 38 तथा झारखंड के एक बच्चे की मौत हो चुकी है। मेडिकल कालेज में गोरखपुर, देवरिया, गोंडा, बस्ती, सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर, कुशीनगर, बलरामपुर, गाजीपुर, आजमगढ़ के अलावा पड़ोसी देश नेपाल और बिहार व झारखंड के भी मरीज उपचार के लिए आ रहे हैं।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि इंसेफेलाइटिस असल में है क्या? ये बीमारी मस्तिष्क के सूजन के कारण होती है। इससे मरीज़ का सेंट्रल नर्वस सिस्टेम प्रभावित होता है। इस बीमारी का वायरस ब्रेन टिशू को इफेक्ट करता है जिससे ब्रेन में सूजन आ जाती है। वैसे तो प्रथम अवस्था के लक्षणों में सिर दर्द और फीवर ही होता है लेकिन स्थिति और भी बिगड़ जाये तो और भी लक्षण नजर आने लगते हैं। डॉ. अभिजीत दास, डाइरेक्टर ऑफ न्यूरोहैबीलीटेशन प्रोग्राम के अनुसार दूसरे लक्षणों में-
• भ्रम की स्थिति (Confusion)
• गर्दन और पीठ में अकड़न
• भटकाव (disorientation)
• चेतना का बदलना (Altered consciousness)
• उद्वेग (Seizures)
• हाथ या पैर में कमजोरी
• बुखार भी होता है
इंसेफेलाइटिस बीमारी संक्रामक रूप इसलिए धारण कर रहा है क्योंकि यह बहुत ही आसानी से स्वस्थ व्यक्ति को प्रभावित कर सकता है। जैसे-
• संक्रमित व्यक्ति द्वारा छोड़े पानी और खाना का सेवन करने पर
• मरीज़ के संपर्क में आने पर
• मच्छर या चिचड़ी (tick) के काटने पर
कभी दूसरे कारणों से भी यह बीमारी हो सकती है, जैसे- वैक्सिनेशन से एलर्जी होने पर या परजीवी का संक्रमण (Parasitic infection) होने पर भी हो सकता है।
उपचार और बचाव
डॉ. दास का कहना है कि वैसे तो इसका इलाज लक्षणों के ऊपर निर्भर करके किया जाता है। सबसे मुश्किल की बात यह है कि इस वायरस से लड़ने वाली दवाओं की संख्या बहुत सीमित हैं।
इसलिए बचाव ही इससे संक्रमण को रोकने का सबसे अच्छा उपाय है। ज्यादातर मामलों में वायरस मच्छरों के काटने से फैलता है इसलिए मच्छरों को घर में या आस-पास पनपने न दें। और खुद के इम्युनिटी को बढ़ाने के साथ-साथ ज़रूरी एहतियात बरतें।
स्रोत: IANS Hindi
चित्र स्रोत - Shutterstock image
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