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Written By: Agencies | Published : February 16, 2015 3:35 PM IST
एक ताजा अध्ययन में पता चला है कि जिन रोगियों के मस्तिष्क के पिछले हिस्से में रक्त प्रवाह कम रहता है उन्हें बार-बार दिल का दौरा पड़ने का खतरा अधिक रहता है। यह निष्कर्ष छह वर्षो तक किए गए अनुसंधान से मिला है। अमेरिका के इलिनॉयस विश्वविद्यालय में चिकित्सा विज्ञान विभाग में न्यूरो सर्जरी के प्राध्यापक एवं प्रमुख अध्ययनकर्ता सेपिडेह अमीन-हंजानी के अनुसार, 'अपने अध्ययन में हमने पाया कि जिन रोगियों के मस्तिष्क में रक्त प्रवाह कम रहा उनमें शुरुआती 12 महीनों में बार-बार दिल का दौरा पड़ने का जोखिम 22 प्रतिशत रहा। जबकि अन्य रोगियों में यह जोखिम मात्र चार प्रतिशत पाया गया।'
अगर 24 महीने की अवधि में देखें तो यह जोखिम बढ़कर 30 प्रतिशत हो गया। मस्तिष्क के पिछले हिस्से में रक्त प्रवाहित करने वाली नलिकाओं के अवरुद्ध होने की समस्या को वीबीडी के नाम से जाना जाता है तथा इस समस्या से ग्रस्त रोगियों में हृदयाघात का खतरा बढ़ जाता है।
वीबीडी से ग्रस्त रोगियों में बार-बार हृदयाघात के जोखिम के अन्य कारण भी हो सकते हैं। इस अध्ययन में हृदयाघात के जोखिम वाले मरीजों में मस्तिष्क के पीछे रक्त प्रवाह का मूल्यांकन एक से दो वर्ष तक किया गया।
अनुसंधानकर्ताओं ने इसके लिए स्टैंडर्ड मैग्नेटिक रेसोनेंस इमेजिंग तकनीक का उपयोग कर रक्त प्रवाह का पता लगाने के लिए एक विशेष सॉफ्टवेयर भी विकसित किया है। हंजानी ने कहा, 'हमारा वास्तविक उद्देश्य प्रत्येक मरीज के लिए सर्वाधिक प्रभावी उपचार का पता लगाना है।'
अमेरिकी प्रांत टिनेसी के नैसविले में स्थित 'इंटरनेशनल स्ट्रोक कॉनफ्रेंस' में अनुसंधानकर्ताओं ने अपना शोध प्रस्तुत किया।
स्रोत: IANS Hindi
चित्र स्रोत: Getty images
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