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विकिरण से बढ़ता है मस्तिष्क ट्यूमर का खतरा

Written by Agencies |Updated : November 5, 2014 4:12 PM IST

परमाणु दुर्घटना से हुआ विकिरण हो या फिर उपचार के दौरान निकला रेडियोधर्मी पदार्थ यह 30 साल से नीचे के व्यक्ति में मस्तिष्क ट्यूमर का खतरा बढ़ा सकता है। शिकागो स्थित लोयला युनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर में भारतवंशी न्यूरोसर्जन विक्रम प्रभु ने कहा, 'जिन लोगों का सिर अधिक विकिरण के प्रभाव आता है, उनमें भविष्य में मस्तिष्क ट्यूमर का कुछ खतरा मौजूद रहता है।' पढ़े:  बिच्छू के विष से मस्तिष्क के कैंसर का हो सकता है इलाज

प्रभु कहते हैं, 'अगर ऐसे व्यक्ति में मस्तिष्क ट्यूमर के लक्षण नजर आते हैं, मसलन उन्हें सिर दर्द, उल्टी और धुंधला दिखना जैसी समस्या झेलनी पड़ती है, तो उसे फौरन चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।' शोधकर्ताओं ने इस अध्ययन के लिए 30 साल से कम उम्र के 35 मरीजों का विश्लेषण किया, जिनके मस्तिष्क ट्यूमर का उपचार किया गया था। इनमें से पांच व्यक्ति कम उम्र में रेडियोधर्मी पदार्थ के संपर्क में आ गए थे। दो मरीजों को पांच और छह साल की उम्र में ल्युकेमिया के उपचार के दौरान विकिरण का सामना करना पड़ा था। इनमें से एक तीन साल की उम्र में मस्तिष्क ट्यूमर के उपचार के दौरान विकिरण के प्रभाव में आए थे, जबकि एक अन्य को सिर में ट्यूमर के इलाज के दौरान विकिरण का सामना करना पड़ा था।

पांचवें मरीज को यूक्रेन में चेर्नोबिल परमाणु दुर्घटना के कारण विकिरण का सामना करना पड़ा था। 20 साल बाद उसे मस्तिष्क ट्यूमर हो गया था। प्रभु ने कहा, 'शुरुआती अध्ययन ने हमें मस्तिष्क पर विकिरण के प्रभाव को करीब से देखने के लिए प्रेरित किया।' वे सभी उम्र के मरीजों पर लगातार अध्ययन कर रहे हैं, जिनका लोयला में ट्यूमर से संबंधित इलाज चल रहा है। शोधकर्ताओं ने मस्तिष्क ट्यूमर का इलाज करा रहे 14 मरीजों की पहचान की है, जो जीवन के शुरुआती वर्षो में विकिरण के संपर्क में आए थे। यह शोध 'न्यूरोसाइंस जर्नल' में प्रकाशित हुआ है। पढ़े:  प्रतिरक्षा प्रणाली मस्तिष्क संबंधी चोट से हुए क्षति से करता है रक्षा

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स्रोत: IANS Hindi

चित्र स्रोत: Getty images


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