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Written By: Agencies | Published : October 20, 2014 3:49 PM IST
जर्मनी और अमेरिका के शोधकर्ताओं के एक समूह ने पाया है कि बुढ़ापा और अवसाद एक ही जीन में बदलाव से जुड़े हुए हैं। एफकेबीपी5 नामक जीन के एक हिस्से से मिथाइल (सीएच3) समूहों को जोड़ने या हटाने से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। शोधकर्ताओं ने पाया कि बुढ़ापा मिथाइलेशन प्रक्रिया को घटा सकता है, जो एफकेबीपी5 जीन को अतिरिक्त मुखर करती। उन्होंने यह भी पाया कि जब कोई अवसादग्रस्त होता है, तो डीमिथाइलेशन प्रक्रिया तेज होती है।
मुख्य लेखक, जर्मनी के म्यूनिख स्थित मैक्स प्लांक इंस्टीट्यूट ऑफ साइकेट्री के एंथनी जेनास ने बताया, 'हमने पाया कि बुढ़ापा और अवसाद डीएनए की प्रक्रिया में बदलाव से जुड़े हैं और यह जीनों के प्रकटन को नियंत्रित करता है जो इस बात का निर्धारण करता है कि हम तनाव पर कैसी प्रतिक्रिया करें।' उन्होंने कहा, 'ये बदलाव सूजन में बढ़ोत्तरी से जुड़े हैं और हमारा मानना है कि इससे दिल और न्यूरोसाइकेट्रिक बीमारियों जैसी बुढ़ापे से जुड़ी कई बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।' एफकेबीपी5 जीन मनुष्यों के गुणसूत्र 6 में पाया जाता है।
यह अध्ययन हाल में बर्लिन में यूरोपियन कॉलेज ऑफ न्यूरोसाइकोफार्मेकोलॉजी में प्रस्तुत किया गया था।
स्रोत: IANS Hindi
चित्र स्रोत: Getty images
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