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Written By: Agencies | Updated : October 8, 2014 6:57 PM IST
अगर नवजात बच्चों की अपेक्षा किशोरों और युवाओं के लिए तपेदिक (टीबी) के टीके विकसित किए जाएं तो वर्ष 2050 तक टीबी के उन्मूलन का लक्ष्य पूरा किया जा सकता है। यह बात एक अध्ययन में कहा गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन द्वारा किए अध्ययन के निष्कर्षो के अनुसार, निम्न और मध्यम आय वाले देशों में किशोरों और व्यस्क युवाओं का टीकाकरण, टीबी को खत्म करने में बहुत अधिक प्रभावी हो सकता है।
अध्ययन के मुख्य लेखक और ब्रिटेन स्थित लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन के शोधार्थी ग्वेन नाइट ने बताया, 'अगर टीबी को 2050 तक खत्म करने का लक्ष्य है तो हमारा अध्ययन यह सबूत देता है कि नए टीके बच्चों की अपेक्षा किशोर और वयस्कों के लिए होने चाहिए।'टीबी ज्यादातर वयस्कों को प्रभावित करता है। इस बीमारी से हर साल 10 लाख से ज्यादा लोग मरते हैं, जिसमें से 95 फीसदी लोग निम्न और मध्य आय वाले देशों से होते हैं।डब्ल्यूएचओ ने टीबी को 2050 तक खत्म करने का लक्ष्य रखा है।
अध्ययन में शोधकर्ताओं ने कम और मध्यम आय वाले देशों में टीकाकरण रणनीति के प्रभाव और लागत प्रभाव का अनुमान करने के लिए एक गणितीय मॉडल का प्रयोग किया।यह मानते हुए कि यह टीके 2024 तक उपलब्ध होंगे, शोधकर्ताओं ने उस रणनीति की पहचान की जो 2024-2050 की अवधि में दुनियाभर में टीबी को सबसे ज्यादा प्रभावित करे।वर्तमान में नवजातों को टीबी का टीका 'बेसील कालमेट-ग्यूरिन'(बीजीसी) व्यापक स्तर पर लगाया जाता है, इसके बावजूद टीबी के मामले और इससे होने वाली मौतों की संख्या बहुत अधिक है।
यह शोध 'प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल अकेडमी ऑफ साइंसेज' शोधपत्र में प्रकाशित हुए।
स्रोत: IANS Hindi
चित्र स्रोत: Getty Images
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