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Written By: Agencies | Updated : February 3, 2016 11:48 AM IST
केरल के अराक्कुनम स्थित टोक -एच इंस्टीट्यूट आफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (टीआईएसटी) ने नेत्र चिकित्सा विज्ञान तथा कैंसर चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले एन डी याग लेज आधारित उपकरण का विकास किया है। डायोड पंप संचालित यह उपकरण पूरी तरह से स्वेदशी तौर पर विकसित हुआ है और कम खर्चीला है। केन्द्र सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) से प्राप्त वित्तीय मदद से लेजर प्रौद्योगिकी में तीन वर्ष के अनुसंधान के बाद यह उपकरण विकसित किया गया है।
यह संस्थान अब इस उपकरण को देश भर में व्यावसायिक तौर पर उपलब्ध कराने की प्रक्रियाओं पर काम कर रहा है। टीआईएसटी के संस्थापक निदेशक डॉ. केवी वर्गीज के अनुसार यह उपकरण स्वेदशी तौर पर वैसे समय में विकसित हुआ है जब देश में ऐसे उपकरणों की जरूरत को पूरा करने के लिये निर्यात पर निर्भर रहना पड़ता है। उन्होंने बताया कि गुजरात में हीरा उद्योग को छोड़कर भारत में अन्य कहीं इस लेजर उपकरण का व्यावसायिक रूप से निर्माण नहीं होता है। उन्होंने बताया, 'हम इस उपकरण को वाणिज्यिक तौर पर देश में शुरू करने के बारे में कदम उठा रहे हैं। देश में तेजी से बढ़ते चिकित्सा एवं अन्य औद्योगिक अनुसंधान को देखते हुये इस उपकरण की बहुत अधिक जरूरत है।' इस उपकरण के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले बीएआरसी के पूर्व वैज्ञानिक तथा टीआईएसटी के प्रोफेसर डॉ. एसके एस नायर ने बताया, 'हमने इस उपकरण का विकास स्वदेशी आधार पर किया है और राष्ट्रीय अनुसंधान प्रयोगशालाओं को छोड़कर इस उपकरण की डिजाइन भारत में अपने तरह की पहली डिजाइन है।' पढ़े: लंग कैंसर रहता है सुषुप्त अवस्था में
उन्होंने कहा कि डायोड पंप संचालित एनडी याग लेजर का उद्योग, चिकित्सा, अनुसंधान और संचार में विभिन्न अनुप्रयोगों के लिए सबसे अधिक उपयोग होता है। इसका उपयोग नेत्र चिकित्सा विज्ञान एवं कैंसर के इलाज में व्यापक तौर पर होता है। उन्होंने बताया कि कॉस्मेटिक चिकित्सा में, यह लेजर बालों को हटाने के लिए इस्तेमाल में लाया जाता है। इसके अलावा चेहरे तथा पैरों की स्पाइडर नसों के इलाज में भी यह उपयोग में लाया जाता है। दंत चिकित्सा में इस लेजर का इस्तेमाल दांतों की कैविटी को दूर करने के लिए होता है। उन्होंने कहा कि इसका इस्तेमाल मोटर वाहन उद्योग में इनग्रैविंग, इचिंग तथा विभिन्न तरह के धातुओं एवं प्लास्टिक घटकों के निर्माण के लिये होता है। सैन्य क्षेत्र में इसका इस्तेमाल लेजर रेंड फाइंडर के रूप में होता है। पढ़े: ब्लैक टी और खट्टे फल गर्भाशय कैंसर के खतरे को करता है कम
स्रोत: IANS Hindi
चित्र स्रोत: Getty images
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