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Written By: Agencies | Published : December 15, 2014 11:39 AM IST
अधिकतर हम यही सुनते हैं कि रक्त में शर्करा की मात्रा अधिक होना दिल के लिए हानिकारक है, लेकिन एक भारतीय मूल के चिकित्सक अपने अध्ययन में पाया है कि हाइपोग्लाइकेमिया (रक्त में शर्करा की मात्रा खतरनाक ढंग से कम होना) भी दिल की बीमारियों को न्यौता दे सकता है। रक्त में शर्करा की मात्रा अधिक होने से दिल की बीमारियों का खतरा होता है, यह हम पहले से ही जानते हैं। लेकिन नया शोध बताता कि शर्करा की मात्रा कम होना भी दिल के लिए हानिकारक है। पढ़े- पाँच प्राकृतिक पदार्थों के द्वारा हृदय को रखें तंदुरूस्त
हाइपोग्लाइकेमिया, इंसुलिन थैरेपी के गंभीर दुष्प्रभावों में से एक है। हाइपोग्लाइकेमिया होने के बाद मधुमेह पीड़ित रोगी का इंसुलिन उपचार होने से उसे दिल की बीमारियां होने का खतरा 60 फीसदी अधिक होता है। ऐसे रोगियों में उन रोगियों के अपेक्षा मौत का खतरा भी दोगुना होता है, जिन्हें हाइपोग्लाइकेमिया नहीं है।
ब्रिटेन के लीसेस्टर विश्वविद्यालय में प्राइमरी केयर डायबिटीज और वस्कुलर मेडिसिन के प्रोफेसर कमलेश खूंटी ने बताया, 'यह पहले अध्ययनों में से एक है जो टाइप 1 और टाइप 2 मधुमेह के रोगियों में दिल की बीमारियों और मौत के खतरे का वर्णन करते हैं।' खूंटी ने बताया, 'खतरे बहुत महत्वपूर्ण हैं और हमें रोगियों में इसकी पहचान जल्द करने की जरूरत है ताकि हम उनमें हाइपोग्लाइकेमिया का खतरा कम करने के लिए रणनीतियां लागू कर सकें।' अध्ययन में टाइम 1 मधुमेह के 3,260 रोगियों और टाइप 2 मधुमेह के 10,422 रोगियों का अध्ययन किया गया। पढ़े- प्राकृतिक तरीके से हृदय को स्वस्थ रखें
मधुमेह के रोगियों की रक्त वाहिनियों में धमनी काठिन्य (आर्टिरीओस्कलेरोटिक) प्लक का गठन होने के कारण उनमें दिल की बीमारियों का खतरा ज्यादा होता है। लीसेस्टटर विश्वविद्यालय के मेलानी डेवीज ने बताया, 'इस शोध से प्राप्त आंकड़ा टाइप 2 मधुमेह से संबंधित हमारे ज्ञान की पुष्टि करता है और टाइम 2 मधुमेह से संबंधित हमारा ज्ञान बढ़ाता है।' परिणाम, मधुमेह के रोगियों की चुनौतियों को दर्शाते हैं। यह परिणाम इंसुलिन-उपचारित रोगियों के प्रबंधन में बदलाव का नेतृत्व कर सकते हैं। पढ़े- अनार के रस से दिल को स्वस्थ रखें
यह शोध 'डायबिटीज केयर' जर्नल में ऑनलाइन प्रकाशित हुआ है।
स्रोत: IANS Hindi
चित्र स्रोत: Getty images
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