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Written By: Agencies | Updated : October 13, 2014 10:45 AM IST
छत्तीसगढ़ शासन की मुख्यमंत्री बाल श्रवण योजना का फायदा उठाकर प्रदेश के 97 बच्चे अब सुन और बोल पा रहे हैं। इन बच्चों को राजधानी रायपुर के शासकीय अंबेडकर अस्पताल में स्थित स्पीच थेरेपी सेंटर में वाणी विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षित किया जा रहा है। योजना के तहत 25 सितंबर को 7 बच्चों की कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी की गई है। येबच्चे अंबेडकर अस्पताल में स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। मुख्यमंत्री बाल श्रवण योजना के तहत छत्तीसगढ़ के शून्य से 7 वर्ष तक के ऐसे बच्चे जो सुन नहीं पाते, उनका इलाज किया जाता है। इसके लिए गरीबी रेखा के नीचे के परिवारों को अधिकतम 6 लाख रुपये और अन्य परिवारों को अधिकतम 4 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी जाती है।
मुख्यमंत्री बाल श्रवण योजना अप्रैल 2010 से संचालित की जा रही है। इस योजना से अब तक 104 बच्चों की कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी हो चुकी है। इनमे से वर्तमान में 60 बच्चे स्पीच थेरेपी सेंटर में प्रशिक्षण ले रहे हैं। अब तक 20 बच्चों का प्रशिक्षण हो चुका है, जो बीच बीच में फॉलोअप के लिए आते रहते हैं। कुछ ऐसे बच्चे जो स्पीच थेरेपी के लिए नहीं आ रहे हैं, उनके माता-पिता से लगातार संपर्क स्थापित कर उन्हें स्पीच थेरेपी के महत्व के बारे में समझाया जा रहा है, ताकि वे अपने बच्चे को स्पीच थेरेपी सेंटर में लाएं। उल्लेखनीय है कि कोक्लियर इम्प्लांट सर्जरी के छह हफ्ते बाद से बच्चों की स्पीच थेरेपी शुरू की जाती है।
स्पीच थेरेपी के प्रशिक्षकों ने बताया की कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी के बाद बच्चों को स्पीच थेरेपी सेंटर में लाना बहुत जरूरी है। बच्चों को अपने आसपास के परिवेश में ढलने के लिए कम से कम 3 साल तक स्पीच थेरेपी का प्रशिक्षण देना अनिवार्य है। वर्तमान में 60 बच्चों को 6-6 बच्चों के बैच में बांटकर एक-एक घंटे का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसमें बच्चों के माता-पिता को भी शामिल गया है, ताकि वे बच्चों को घर पर भी अभ्यास करवाएं। इसके लिए बच्चों के घर पर रहने के दौरान प्रशिक्षकों द्वारा सभी बच्चों के अभिभावकों को फोन पर भी जानकारी दी जाती है।
स्पीच थेरेपी सेंटर में वाणी विशषज्ञों द्वारा बच्चों को चरणबद्ध प्रशिक्षण दिया जा रहा है। पहले उन्हें आवाज की पहचान करना सिखाया जाता है, फिर आवाज को समझना और उपयोग करना सिखाया जाता है। बच्चों को विभिन्न सामूहिक गतिविधियों जैसे फैंसी ड्रेस चित्रकला और नृत्य आदि के माध्यम से भी प्रशिक्षित किया जाता है। साथ ही बच्चों की अभिरुचि समझने के लिए समय-समय पर विभिन्न प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाती हैं।
स्रोत: IANS Hindi
चित्र स्रोत: Getty images
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