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Written By: Agencies | Published : December 12, 2014 11:26 AM IST
अफ्रीकी देशों में हजारों लोगों की जान लेने वाले इबोला विषाणु के बारे में अभी तक यह ठीक-ठीक पता नहीं चल पाया है कि वह कितने दिनों तक जीवित रहता है। हालिया शोध में यह बात सामने आई है। इबोला का प्रसार संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थ के सीधे संपर्क में आने से होता है।
अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ पीट्सबर्ग में सहायक प्रोफेसर काइल बिब्बी ने कहा, 'विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) आपसे कह रहा है कि संक्रमित व्यक्ति के अपशिष्ट पदार्थ को शौचालयों या नालियों में डाल देने से उसमें मौजूद विषाणु मर जाते हैं।' बिब्बी ने कहा, 'वह सही हो सकते हैं, लेकिन इसका कोई सबूत नहीं है।' पढ़े- इबोला वायरस का नामकरण
शोधकर्ताओं ने कहा, 'सतह, जल या किसी तरल में विषाणु कितने दिन तक जीवित रह सकता है यह पता लगाना और इस बीमारी के प्रसार से रोकने के लिए कोई प्रभावी कीटाणुशोधन प्रक्रिया विकसित करना बेहद कठिन है।' वर्तमान में डब्ल्यूएचओ के दिशानिर्देश के तहत मरीज के तरल अपशिष्ट पदार्थो को शौचालय या नालियों में डाल देना चाहिए। हालांकि इबोला शोध प्रयोगशाला के मुताबिक मरीज के तरल अपशिष्ट पदार्थो को नाली में डालने से पहले उनका कीटाणुशोधन करना चाहिए। पढ़े- अब 15 मिनट में इबोला की पुष्टि का जांच होगा संभव
शोध पत्र में शोधकर्ताओं ने कहा है कि यह कोई नहीं जानता कि विषाणु कितने दिनों तक जीवित रहता है। यह अध्ययन पत्रिका 'इन्वारमेंटल साइंस एंड टेक्नोलॉजी लेटर्स' में प्रकाशित हुआ है।
स्रोत: IANS Hindi
चित्र स्रोत: Getty images
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