इबोला वायरस का नामकरण

WrittenBy

Written By: Agencies | Published : October 13, 2014 1:37 PM IST

पश्चिम अफ्रीका में बीते मार्च महीने में महामारी फैलने के बाद अब तक 3,300 लोगों की बलि ले चुका जानलेवा इबोला वायरस का नाम 1976 में एक नदी के नाम पर रखा गया था। वर्तमान समय में कांगो गणतंत्र के नाम से जाने जाने वाले क्षेत्र में सबसे पहले इबोला के लक्षण मिले थे और वहां वायरस की चपेट में आकर कई लोग गंभीर रूप से बीमार पड़े थे। उस समय यह क्षेत्र जायरे के नाम से जाना जाता था।

वायरस का पता लगाने वाले पीटर पायट ने अपने संस्मरण 'नो टाइम टू लूज : ए लाइफ इन परस्युट ऑफ ए डेडली वायरस' में लिखा था कि इबोला के नामकरण की कहानी छोटी और आकस्मिक है।यह वायरस सबसे पहले यांबुकु नामक गांव में फैला था, तो इसका नाम गांव के नाम पर भी हो सकता था, लेकिन वैज्ञानिकों को यह एहसास हुआ कि ऐसा करने से यह गांव और यह स्थान हमेशा के लिए मनहूस मान लिया जाएगा।

लाइव साइंस के मुताबिक, सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन (सीडीसी) के शोधकर्ता कार्ल जॉनसन ने वायरस का नाम एक नदी के नाम पर रखने की सलाह दी ताकि भविष्य में किसी खास क्षेत्र या स्थान पर नाम का बुरा असर न पड़े। वैज्ञानिकों ने नक्शे में देखा और पाया कि यांबुकु गांव के पास से एक नदी बहती है, जिसका नाम इबोला है, जिसका स्थानीय लिंगाला भाषा में अर्थ होता है 'काल नदी'। पायट ने अपने संस्मरण में लिखा, 'यह नाम उपयुक्त लगा, क्योंकि यह अशुभ का संकेत था।'

 स्रोत: IANS Hindi

चित्र स्रोत: Getty images


लेटेस्ट अप्डेट्स के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो कीजिए।स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के लिए न्यूजलेटर पर साइन-अप कीजिए।

Add The Health Site as a Preferred Source Add The Health Site as a Preferred Source