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घरेलु हिंसा का बुरा प्रभाव गर्भस्थ शिशु पर भी पड़ता है

घरेलू हिंसा का बच्चों पर बुरा प्रभाव पड़ता है यह तो हम जानते हैं, लेकिन एक शोध में पता चला है कि घरेलू हिंसा बच्चे को जन्म से पहले यानी गर्भ में भी नुकसान पहुंचा सकती है। जिन बच्चों की मांए गर्भावस्था के दौरान घरेलू हिंसा का शिकार होती हैं, उन बच्चों में जन्म के बाद पहले साल में भावनात्मक एवं व्यावहारिक सदमे के लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

ऐसे बच्चों को अक्सर नींद में बुरे सपने आते हैं, वे छोटी बातों पर चौंक उठते हैं, तेज रौशनी में उन्हें परेशानी होती है, शोर शराबे से बेचैन हो जाते हैं, लोगों से मिलने में घबराते हैं और खुशी के क्षण में भी परेशानी महसूस करते हैं। अमेरिका के मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी में मनोविज्ञान के प्रोफेसर अलितिया लेवेंडोस्की ने कहा, 'मांओं के लिए यह जानना कि गर्भावस्था में घरेलू हिंसा से गुजरना या ऐसी घटनाओं का गवाह बनना उनके शिशु के मानसिक स्वास्थ के लिए हानिकारक हो सकता है, उन्हें ऐसी स्थिति से बचने के लिए प्रेरणा का काम करेगा।'

लेवेंडोस्की ने कहा, 'घरेलू हिंसा से गर्भवती स्त्री के तनाव पर प्रतिक्रिया देने वाली प्रणाली पर प्रभाव पड़ता है और क्रिस्टोल नामक हार्मोन में वृद्धि होती है और इससे उनके गर्भ में पल रहे भ्रूण में भी क्रिस्टोल का स्तर बढ़ता है।' उन्होंने बताया, 'क्रिस्टोल एक न्यूरोटॉक्सिक है और इसकी अधिक मात्रा या स्तर भ्रूण के लिए दुष्प्रभावी और हानिकारक होता है।'

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यह अध्ययन अनुसंधान जर्नल 'चाइल्ड अब्यूज एंड नेग्लेक्ट' में प्रकाशित हुआ है।

स्रोत: IANS Hindi

चित्र स्रोत: Getty images


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