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Written By: Agencies | Published : December 1, 2014 1:43 PM IST
डरावनी घटनाओं और डरावने अनुभव से भले हम जल्द ही उबर आएं या भूल जाएं, लेकिन हमारे मस्तिष्क में ऐसी घटनाओं के ब्यौरे लंबे समय तक दर्ज रहते हैं। एक ताजा अध्ययन के अनुसार, हमारा मस्तिष्क डरावनी घटनाओं से जुड़े ब्यौरों जैसे घटना के स्थान, देखी हुई चीजों और भावनात्मक उतार-चढ़ाव को बिल्कुल अलग तरीके से संजोकर रखता है।
शोध के सहायक एवं स्पेन के वेलविट्ज जैवचिकित्सकीय अनुसंधान संस्थान के लुआस फ्यूएंटेमिला के अनुसार, 'यह अध्ययन डरावने अनुभवों के बाद तनाव एवं विकार की समस्या पनपने की प्रक्रिया समझने में मददगार है।' अध्ययन के तहत अनुसंधानकर्ताओं ने मनुष्यों में अंतर्निहित और बाह्य स्मृतियों के चिह्नों का क्रमवार अध्ययन किया। अनुसंधानकर्ताओं ने प्रयोगशाला में डरावनी परिस्थिति पैदा कर और सामान्य परिस्थितियों में 86 लोगों की त्वचा के इलेक्ट्रिकल लक्षणों का अध्ययन किया। इसके तहत लोगों को कुछ शब्द पढ़ने के लिए दिए गए थे।
शोध पत्रिका 'न्यूरो बायोलॉजी ऑफ लर्निग एंड मेमोरी' के ताजा अंक में प्रकाशित शोध-पत्र के लेखक पाउ पाकार्ड ने कहा, 'दोनों ही परिस्थितियों में भूलने की प्रक्रिया सामान्य रही। समय के साथ वे सारे शब्द भूल गए।' पाकार्ड ने आगे कहा, 'लेकिन डरावने अनुभव के संदर्भ में भावनात्मक अंतर्निहित प्रतिक्रिया देते हुए त्वचा के इलेट्रिकल लक्षण बिल्कुल वैसे ही रहे, बल्कि सामान्य परिस्थितियों के मुकाबले कहीं अधिक सघन रहे।'
पाकार्ड ने अपने शोध में कहा कि समय के साथ हम स्मृति के कुछ हिस्से पूरी तरह भूल जाएं और हमें उसके विस्तृत ब्यौरे याद न रहें, लेकिन भावनात्मक स्मृतियां फिर भी बची रहती हैं।
स्रोत: IANS Hindi
चित्र स्रोत: Getty images
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