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दिवाली के समय तापमान के लगातार बदलाव के कारण आँखों पर इसका प्रभाव पड़ता है और आँखों के कंजेक्टिवाइटिस नामक बीमारी की चपेट में आने की संभावना बढ़ जाती है।
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अतुल श्रीवास्तव कहते हैं कि मौसम परिवर्तन के समय अपनी त्वचा और बालों का लोग खास ख्याल रखते हैं, मगर आँखों के प्रति लापरवाह बने रहते हैं, जबकि मौसम परिवर्तन के समय आँखों की भी खास देखभाल करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि बदलता मौसम त्वचा, बाल और आँखों पर प्रभाव डालता है। बदलते मौसम का सर्वाधिक प्रभाव आँखों पर पड़ता है। आँखों में संक्रमण और बीमारियों का कारण कीटाणु और जीवाणु ही होते हैं।
लक्षण:
कंजेक्टिवाइटिस आँखों से जुड़ी सबसे आम बीमारी है। वैसे तो इसका कोई सटिक इलाज नहीं होता है। इसको ठीक होने में दस से बारह दिन लगता है। लेकिन आँखो के प्रभावित होने के प्रथम अवस्था में ही डॉक्टर को दिखाना ज़रूरी होता है क्योंकि इस बीमारी के बढ़ जाने पर आँखों की स्थिति सोचनीय हो जाती है। कंजेक्टिवाइटिस के कुछ लक्षण इस प्रकार है:
• लाल आँखें- इस अवस्था में आँखों के सफ़ेद भाग में लाली छा जाती है जो इस बीमारी के प्रथम अवस्था से ही शुरू हो जाती है।
• आँखों के पलकों में सूजन - कंजेक्टिवाइटिस की अवस्था में आँखों की पलकों में सूजन आ जाता है। जो पहले तो एक आँख में होता है फिर दूसरे आँख में भी होने लगता है।
• आँखों में पानी आना- आँख लाल हो जाने के बाद लगातार पानी आने लगते हैं जो वायरल और एलर्जी वाले आँखों के आम लक्षण है।
• आँखों में जलन- इस अवस्था में आँख खुजलाने लगते हैं और उनको खुजलाने पर आँख जलने लगते हैं।
• आँखों से पीव (pus) निकलना- आँखें लाल होने पर आँखों से हरा या पीला रंग का पीव निकलने लगता है।
• आँखों मे कुछ होने का अनुभव- हमेशा आँखों में कुछ होने का अनुभव होता है, जिसके कारण लोग आँखों को मलने लगते हैं।
• पपड़ीदार आँखें- इस अवस्था में जब आप सोकर उठते हैं तब आपकी आँखों की पलकें पपड़ी पड़ने के कारण सट जाती हैं।
• संवदेनशील आँखें- इस अवस्था में आँखें तेज प्रकाश को सहन नहीं कर पाते हैं। इसलिए ज़्यादा देर तक टी.वी. नहीं देखना चाहिए और कम्प्यूटर पर काम नहीं करना चाहिए, इससे आँखों पर बूरा प्रभाव पड़ता है। आँखों को बार-बार नहीं धोना चाहिए, इससे उसको क्षति पहुँचती है।
संक्रमण न होने दें :
चिकित्सकों का सुझाव है कि आँखों के लिए स्वस्थ भोजन और अच्छी नींद दोनों ही बेहद आवश्यक हैं। खाने में हरी सब्जियाँ ज्यादा खाएं। दिन में कम से कम दो लीटर पानी पीएं, ताकि आपके शरीर की गंदगी बाहर निकल जाये और नमी बनी रहे, जो आँखों के लिए भी जरूरी होता है। आँखों में चिकित्सक द्वारा सुझाई गई ऐसी दवाएं डालें जो आँखों को शुष्क होने से रोके और संक्रमण न पैदा होने दें। इस मौसम में कंजेक्टिवाइटिस के साथ ही अन्य संक्रमण की आशंकाएं भी अधिक होती हैं।
गॉगल शेयरिंग भी खतरनाक :
गॉगल पहनने का प्रधान कारण होता है आँखों को तेज प्रकाश से बचाना, धूल या कोई भी बाहरी चीज को आँखों में गिरने से बचाना आदि। इसको पहनने से दूसरों की आँखों को इस संक्रमण को होने से कुछ हद तक बचाया जा सकता है।
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. श्रीवास्तव के मुताबिक, सबकी आँखों की क्षमता अलग-अलग होती है। ऐसे में किसी से चश्मा लेकर पहनना ठीक नहीं है। इससे आँखों पर अधिक दबाव होने के साथ ही लगातार ऐसे चश्मे के इस्तेमाल से विजन पर भी असर पड़ सकता है।
सावधानियाँ :
• आँखों की सुरक्षा के लिए संवेदनशील इस मौसम में गुणवत्ता युक्त चश्मे का इस्तेमाल करें।
• रात में सोते समय आई क्लीनिंग ड्रॉप्स या गुलाब जल का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
• आपके द्वारा इस्तेमाल किया गया रूमाल और तौलिया किसी को इस्तेमाल न करने दें।
• बिना चिकित्सक के सलाह के कोई भी आइ ड्रॉप (eye drop) न डालें।
डॉ. श्रीवास्तव का कहना है कि संक्रमण होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। उन्होंने बताया कि आँखों को गर्म पानी से सेंकने से भी राहत मिलती है। इसके अलावा आँखों में गुलाबजल डालने से बहुत आराम मिलता है।
लेकिन सबसे ज़रूरी बात यह है कि दिवाली में यदि आपको कंजेक्टिवाइटिस हुआ हैं तो इस अवस्था में पटाखें जलाने न जायें क्योंकि पटाखों के जलने के बाद जो धुँआ निकलता है वह आपके आँखों को नुकसान पहुँचा सकता है और तेज प्रकाश में आँखों को दर्द भी हो सकता हैं। इसलिए आँखों को स्वस्थ रखते हुए दिवाली मनायें।
स्रोत: IANS Hindi
चित्र स्रोत: Getty images
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