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दिल की धड़कनों से संबंधित बीमारियों के इलाज की नवीनतम तकनीकों के बारे में चर्चा

दिल की धड़कनों से संबंधित बीमारियों की जांच और इलाज की नवीनतम तकनीकों के बारे में चर्चा करने के लिए भारत में पहली बार एपीएचआरएस वैज्ञानिक सत्र का आयोजन किया गया है, जिसमें दुनियाभर के 250 हृदय रोग विशेषज्ञ हिस्सा ले रहे हैं। सत्र 29 अक्टूबर से शुरू हुआ, जो एक नवंबर तक चलेगा। 7वें एशिया एपीएचआरएस वैज्ञानिक सत्र की आयोजन समिति के अध्यक्ष और साकेत सिटी हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजी विभाग प्रमुख, डॉ. मोहन नायर ने कहा, 'मुझे यह बताते हुए बेहद प्रसन्नता हो रही है कि प्रतिष्ठित एपीएचआरएस के 7वें सत्र का आयोजन भारत की राजधानी में हो रहा है। यह एक ऐसा कार्यक्रम है जिसमें दुनिया भर के सबसे ज्यादा कार्डिएक इलेक्ट्रोफिजियोलॉजिस्ट हिस्सा लेते हैं।'

उन्होंने बताया, 'एपीएचआरएस वैज्ञानिक सत्र में इस बार रिदम संबंधी बीमारियों की जांच और इलाज के क्षेत्र में हुए नए विकास और नई तकनीकों पर चर्चा हो रही है। इस बार कार्यक्रम में 1500 से भी ज्यादा जाने-माने हृदयरोग विशेषज्ञ, फिजिशियन और छात्र हिस्सा ले रहे हैं।' एपीएचआरएस के अध्यक्ष डॉ. यंग-हून किम ने कहा, 'एपीएचआरएस की शुरुआत वर्ष 2008 में हुई थी। इसका आयोजन एशिया प्रशांत के विभिन्न हिस्सों में होता आ रहा है। अलग-अलग देशों में इस सम्मेलन को आयोजित करने के पीछे जो सबसे बड़ा कारण है, वह है इलाज और जांच के क्षेत्र में हुए नए तकनीकी विकास से न सिर्फ फिजिशियन, हृदय रोग विशेषज्ञ, इलेक्ट्रोफिजियोलॉजिस्ट्स को अवगत कराना बल्कि लोगों को भी इस बारे में जागरूक करना है।' उल्लेखनीय है कि इसके पहले एपीएचआरएस का आयोजन हांगकांग, सिंगापुर, चीन, कोरिया, जापान और ताइवान में हो चुका है। अगले साल यह सम्मेलन मेलबर्न (ऑस्ट्रेलिया) में नवंबर 2015 में होगा।

स्रोत: IANS Hindi

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चित्र स्रोत: Getty images


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