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Written By: Agencies | Published : October 31, 2014 2:21 PM IST
राष्ट्रीय राजधानी में एक पुरुष अधिकार संगठन ने गुरुवार को कहा कि वैश्विक लैंगिक अंतर सूचकांक पर वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की रिपोर्ट एक पक्षीय तथा अवैज्ञानिक है और भारत सरकार को इसका विरोध करने के लिए कहा। रिपोर्ट में 142 देशों में भारत का 114वां स्थान है। सेव इंडियन फैमिली फाउंडेशन के संस्थापक सदस्य अनिल कुमार ने कहा, 'हमेशा की तरह उच्च प्रति व्यक्ति आय तथा बेहद कम जनसंख्या वाले देश जैसे फिनलैंड, नॉर्वे तथा आइसलैंड शीर्ष पर हैं।' उन्होंने कहा, 'रिपोर्ट के साथ समस्या यह है कि सामाजिक मसलों के लिए पुरुषों पर आरोप लगाकर यह पुरुष विरोधी विचार फैलाने का काम रहे हैं, जबकि इसका दोषी गरीबी और खराब शासन है। वहीं यह पुरुषों द्वारा सामना किए जाने वाले नुकसानों की पूरी तरह अनदेखी करता है।' उन्होंने एक बयान में कहा, 'यह रिपोर्ट खुले तौर पर केवल एक ही दिशा में लैंगिक अंतर को मापने वाला है और पुरुषों द्वारा झेले जाने वाले लैंगिक असमानता पर खुशी जाहिर करता है। इसलिए यह रिपोर्ट खुले तौर पर एकपक्षीय है।'
लैंगिक अंतर को पुरुषों तथा महिलाओं के लिए दोनों दिशाओं में मापा जाना चाहिए।सीआईएफएफ अध्यक्ष राजेश वखारिया ने कहा, 'पुरुषों को आरोपित करने का बिंदु क्या है, जब वे पहले से ही कम जीवन प्रत्याशा के साथ महिलाओं की तुलना में अधिक दुखी रहते हैं। आत्महत्या की दर भी उनमें सर्वाधिक है। किसी भी दुर्घटना में महिलाओं की तुलना में तीन से चार गुना ज्यादा पुरुष मारे जाते हैं।' उन्होंने कहा कि भारत सरकार को इस तरह के एक पक्षीय, पूर्वाग्रहग्रस्त, अवैज्ञानिक रिपोर्टों के प्रकाशन का विरोध करना चाहिए, जो महिलाओं तथा पुरुषों में एक दूसरे के खिलाफ खाई पैदा करने का प्रयास करते हैं।
स्रोत: IANS Hindi
चित्र स्रोत: Getty images
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