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Written By: Agencies | Published : January 21, 2015 1:03 PM IST
कोल्ड स्प्रिंग हार्बर लैबोरेटरी (सीएसएचएल) के शोधकर्ताओं के एक दल ने एक ऐसी विधि विकसित की है, जिससे डरावनी यादों और व्यवहार पर काबू पाया जा सकता है। शोधकर्ताओं ने ऐसी विधि विकसित की है, जो मनुष्य के अंतर्मन में उठनेवाली घबराहट पर नियंत्रण कर सकती है।
चूहों पर किए गए शोध में शोधकर्ताओं ने पाया कि डर की भावना मस्तिष्क के एक खास हिस्से में होती है। इस रहस्य को सुलझाने के लिए सहायक प्रोफेसर बो ली-लेड की टीम ने उस क्लस्टर ऑफ न्यूरांस का अध्ययन किया, जो मस्तिष्क में पैरावेंट्रीकुलर न्युक्लस ऑफ द थैलेमस (पीवीटी) का निर्माण करती हैं।
मनुष्य के मस्तिष्क का यह क्षेत्र तनाव के नजरिए से बेहद संवेदनशील होता है और शारीरिक एवं मनौवैज्ञानिक तनाव के लिए संवेदक का काम करता है। शोधकर्ताओं ने पता लगाया कि क्या चूहों में पीवीटी का डर की भावना और यादाश्त से संबंध है? ली ने कहा, 'हमने पाया कि पीवीटी पशुओं में पीवीटी की भूमिका डर की भावना और यादाश्त के संबंध में महत्वपूर्ण है।' उन्होंने कहा, 'इस शोध से पता चलता है कि मस्तिष्क में घर की हुई डर की भावना पर काबू पाया जा सकता है और भविष्य में घबराहट और डर से संबंधित मनौवैज्ञानिक विकारों का इलाज किया जा सकता है।'
दुनियाभर में चार करोड़ वयस्क लोग घबराहट और डर की भावना का शिकार होते हैं। यह शोध जर्नल नेचर में प्रकाशित हुआ है।
स्रोत: IANS Hindi
चित्र स्रोत: Getty images
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