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Written By: Agencies | Published : October 28, 2014 3:57 PM IST
पटना सहित बिहार के सभी शहरी और ग्रामीण इलाकों में सोमवार को 'नहाय-खाय' के साथ चार दिनों तक चलने वाला लोक आस्था का महापर्व छठ प्रारंभ हो गया। पटना के गंगा तटों पर सुबह से ही छठव्रतियों की भीड़ उमड़ने लगी। पहले दिन छठ व्रत करने वाले पुरुष और महिलाएं अंत:करण की शुद्घि के लिए नदियों, तालाबों और विभिन्न जलाशयों में स्नान करने के बाद अरवा चावल, चने की दाल और लौकी (कद्दू) की सब्जी का प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं। परिवार की समृद्घि और कष्टों के निराकरण के लिए इस महान पर्व के दूसरे दिन मंगलवार को श्रद्घालु दिनभर निराहार रह कर सूर्यास्त होने के बाद खरना करेंगे। शाम को भगवान भास्कर की पूजा करेंगे और रोटी, दूध तथा गुड़ से बनी खीर का प्रसाद ग्रहण करेंगे। इस प्रसाद को ग्रहण करने के लिए आसपास के लोग भी व्रती के घर पहुंचते हैं।
इसके साथ ही 36 घंटे का निर्जला व्रत प्रारंभ हो जाएगा। पर्व के तीसरे दिन बुधवार को छठव्रती शाम को नदी, तालाबों सहित विभिन्न जलाशयों में पहुंचकर अस्ताचलगामी सूर्य को अघ्र्य अर्पित करेंगे। पर्व के चौथे दिन गुरुवार को उदीयमान सूर्य को अघ्र्य देने के साथ ही श्रद्घालुओं का व्रत समाप्त हो जाएगा। इसके बाद व्रती अन्न-जल ग्रहण कर 'पारण' करेंगे। छठ को लेकर पटना में सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए गए हैं। आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव ब्यास जी के मुताबिक पटना के गंगा के तटों पर एनडीआरएफ की छह टीमें 36 मोटरबोटों के साथ तैनात की गई हैं। उन्होंने कहा कि इसके अलावा अन्य कई जिलों में भी एनडीआरएफ के जवानों की तैनाती की गई है। पुलिस के एक अधिकारी के मुताबिक पटना के शहरी क्षेत्रों में 230 दंडाधिकरियों की प्रतिनियुक्ति की गई है तथा सभी छठ घाटों पर पुलिस जवानों को लगाया गया है। गंगा नदी में निजी नौकाओं के परिचालन पर रोक लगा दी गई है तथा छठ घाटों पर पटाखा छोड़ने पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है। उल्लेखनीय है कि रविवार को राज्य के मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने गंगा घाटों का निरीक्षण किया था।
स्रोत: IANS Hindi
चित्र स्रोत: Getty images
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