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क्या बिहार बोर्ड की 12 वीं क्लास की टॉपर ने exam में cheating किया है?

बिहार बोर्ड के 12 वीं क्लास के टॉपर को जब राजनीति शास्त्र के बारे में पुछा गया तो उन्होंने ये कहा कि इसमें खाने के बारे में बताया जाता है!

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इस वीडियो से भारत का भविष्य खतरे में नजर आ रहा है! इस वीडियो को देखकर आप एक बार को चौंक जाएंगे कि कैसे बिहार बोर्ड परीक्षाओं की टॉपर खुद अपने सब्जेट के बारे में कुछ भी नहीं जानती। इसे देखकर आप ये सोचने पर मजबूर हो जाएंगे कि किस प्रकार के स्टूडेंट से आप उम्मीद लगाए बैठें हैं कि ये कल को हमारे देश का भविष्य बनेंगे। इस वीडियो में क्लास 12 की परीक्षा में टॉप करने वाली लड़की से जब ये सवाल किया गया कि पॉलिटिकल साइन्स यानि राजनीति शास्त्र क्या है तो उसने बताया कि इस विषय में खाने के बारे में बताया जाता है।

यहाँ तक कि उसने पॉलिटिकल साइन्स का उच्चारण भी सही तरीके से नहीं किया। हाँ, ऐसा हो सकता है कि कैमरा के सामने लोग नर्वस हो सकते हैं या उनकी जबान लड़खड़ा सकती है लेकिन 17-18 साल की लड़की से उनके पढ़ाई के बारे में सवाल किया गया था वह इतने सरल थे कि इस बारे में कन्फ्यूज़ होने की कोई बात ही नहीं थी।

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इस विडियो के ट्रेंड होते ही बिहार बोर्ड अपनी शर्मिंदगी को छिपाने के लिए तुरन्त इस छात्रा के मेरिट को री-चेक करने का ऑर्डर पास किया है। इस घटना से जो सवाल सबसे पहले दिमाग में आता है वह ये है कि स्टूडेंट्स नकल करते क्यों हैं?

प्रतियोगिता- डॉ. पवन सोनार, कंसल्टेंट साइक्रैटिस्ट, मुम्बई का कहना है कि वे स्टूडेंट नकल करते हैं जो स्कूल या कॉलेज में पढ़ने नहीं जाते सिर्फ मार्क्स लाने या प्रतियोगिता में पास करने के लिए जाते हैं, उनके लिए नकल करना लाज़मी हो जाता है।

दबाव- दूसरा सबसे बड़ा कारण होता है कि बच्चे नकल इसलिए करते हैं क्योंकि माता-पिता प्रेशर देते हैं या समाज के नजर में नंबर वन पोज़िशन पाने की चाह रखते हैं। या उन्हें अच्छे मार्क्स पाकर व्यक्तिगत जीवन में जल्दी पैरों पर खड़ा होकर परिवार का भार कम करना है।

आत्मविश्वास- कई बार बच्चे आत्मविश्वास की कमी के कारण ये समझने लगते हैं कि वे परीक्षा में पास नहीं हो पायेंगे इसलिए वे अपने मानसिक दबाव में आकर नकल कर बैठते हैं।

आसपास का माहौल - अक्सर जब हॉल में सब नकल धड़ल्ले से कर रहे होते हैं तो दूसरे ये सोचते हैं कि मैं क्यों न करूं!

पूअर वैल्यू सिस्टम- यहाँ तक कई बार टीचर नकल करना बुरा नहीं समझते, इसलिए वे इसको न करने के महत्व की शिक्षा ही नहीं देते हैं।

'चलता है'  की सोच- डॉ. सोनार का कहना है कि ये ‘चलता है’ मनोभाव जहाँ पर सब लोग इस बात को आसानी से मान बैठे हैं कि चलता है तो चलने दो। कोई भी इसको दंडनीय अपराध नहीं मानता है।

कोई रोम मॉडल नहीं है- जब बच्चे ये देख रहे हैं कि घर के बड़े भाई-बहन नकल करके पास हो रहे हैं तो उनके दिमाग में यही बैठ जाता है कि ये सही है, इसमें कोई गलत नहीं है।

नकल करना गलत ही इसकी शिक्षा देने का दायित्व माता-पिता और शिक्षक का होता है। उन्हें बचपन में नकल न करने के महत्व के बारे में बारे में समझाना चाहिए।

इस विडियो में देखिये कि बिहार के बाहरवीं पास टॉपर ने राजनीति शास्त्र के बारे में क्या है!

चित्र और विडियो स्रोत: Times Now/YouTube


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