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Written By: Agencies | Updated : February 3, 2016 11:48 AM IST
यहां के अमृता इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एआईएमएस) ने ब्लड कैंसर और मेलोइड ल्यूकीमिया से पीड़ित एक 19 वर्षीय युवती के उपचार के लिए एक नया तरीका इजाद किया है। नई उपचार विधि को माइक्रोट्रांस्प्लांट नाम दिया गया है। इस प्रक्रिया में जानबूझकर बेमेल कोशिकाओं का संचार किया जाता है, इसमें सामान्य कीमोथेरेपी भी शामिल है। यह अद्वितीय प्रक्रिया ल्यूकीमिक कोशिकाओं की प्रतीरक्षात्मकता के नष्ट होने पर आधारित है।
दो कीमोथेरेपी के बाद भी युवती की बीमारी जब जानलेवा हो गई तब एआईएमएस में अस्थि और मज्जा प्रत्यारोपण कार्यक्रम के प्रमुख नीरज सिद्धार्थ के नेतृत्व में विशेषज्ञों की एक टीम ने लड़की का उपचार करना शुरू किया। यह अद्वितीय प्रक्रिया ल्यूकीमिक कोशिकाओं की प्रतिरक्षात्मक शिकार पर आधारित है। एआईएमएस के मुताबिक, इस प्रक्रिया का परिणाम सफल रहा।
अमेरिका के बाल्टीमोर स्थित जॉन्स हॉपकिन्स हॉस्पिटल और चीन से इस मामले में विशेषज्ञों द्वारा निर्देशित किए गए डॉक्टर सिद्धार्थ ने कहा, "विश्वव्यापी सेलुलर चिकित्सा का प्रयोग उत्तरी अमेरिका में चुनिंदा केंद्रों में अधिक परिष्कृत और महंगे ढंग से किया जाता है।
स्रोत: IANS Hindi
चित्र स्रोत: Getty images
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