... Read More
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts. Cookie Policy.
Written By: Agencies | Published : October 21, 2014 3:23 PM IST
इबोला से निपटने के लिए अफ्रीकी यूनियन कमिशन (एयूसी) सोशल अफेयर्स के तहत काम करने वाली अफ्रीकन यूनियन सपोर्ट टू इबोला आउटब्रेक इन साउथ वेस्ट अफ्रीका (एएसईओडब्ल्यूए) ने भारत सरकार से चिकित्सकीय मानव संसाधन उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। अफ्रीकी यूनियन कमीशन (एयूसी) के सामाजिक मामलों के आयुक्त मुस्तफा सिद्दीकी कलोको ने बताया कि भारत में प्राकृतिक और मानवीय दोनों आपदाएं आती हैं और ऐसी प्रतिकूल परिस्थितयों से निपटना वह अच्छी तरह से जानता है, इसलिए भारत के साथ से इबोला से लड़ने में बड़ी मदद मिलेगी। कालोको ने आईएएनएस से कहा, 'भारत के पास कई अनुभवी चिकित्सक और प्रशिक्षित लोग हैं, जिन्हें इस तरह की आपदाओं से निपटने के लिया तैनात किया जाता है। चूंकि हमारे यहां ऐसे लोगों की कमी है, इसलिए अगर वे कुछ चिकित्सकों को हमारे यहां भेजेंगे, तो हमें मदद मिलेगी।'
फिलहाल यह संगठन इबोला से लड़ने के लिए बुनियादी ढांचा, उपचार केंद्र तथा अस्पताल आदि कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। पश्चिमी अफ्रीका के तीनों देश इस जानलेवा बीमारी से जूझ रहे हैं। एयूसी के प्रमुख एनकोसाजाना दलामिनी जुमा के मुताबिक, बुनियादी ढांचे और अन्य सुविधाओं को दुरुस्त करने के लिए लाइबेरिया में अमेरिका, सिएरा लियोन में ब्रिटेन, जबकि फ्रांस गिनी में काम करेगा। जुमा ने आईएएनएस से कहा कि मानव संसाधन को लेकर कोई भी देश सहायता करने के लिए तैयार नहीं दिख रहा है। अगर बुनियादी सुविधाएं बहाल हो भी जाती हैं, तो हमें इन अस्पतालों में काम करने के लिए लोगों की जरूरत पड़ेगी। इसलिए हम न केवल अपने सदस्य देशों, बल्कि पूरे विश्व से सहायता मांग रहे हैं कि वह अपने यहां से कुछ लोगों को इस बीमारी से निपटने के लिए भेजें।
एएसईओडब्ल्यूए ने 100 स्वयंसेवकों को इन इलाकों में भेजा था, जो एक हफ्ते में वापस आ जाएंगे, इसके बाद हमें 100 अतिरिक्त लोगों की जरूरत पड़ेगी। आने वाले छह हफ्तों में हमें 500 चिकित्सकों की जरूरत होगी। कालोका के मुताबिक, हमारे लिए बीमारों का उपचार करने के लिए चिकित्सकों की व्यवस्था करना एक बड़ी चुनौती है और भारत इसमें माहिर है, इसलिए हम उसकी ओर आशा भरी निगाह से देख रहे हैं।
स्रोत: IANS Hindi
चित्र स्रोत: Getty images
लेटेस्ट अप्डेट्स के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो कीजिए।स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के लिए न्यूजलेटर पर साइन-अप कीजिए।