
... Read More
Written By: Anshumala | Published : June 20, 2020 6:34 PM IST
ICMR की स्टडी के बावजूद दिल्ली में कोविड-19 मरीजों को दी जाएगी प्लाज्मा थेरेपी
Satyendar jain health: कोरोनावायरस (Coronavirus) की चपेट में आए दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन (Satyendar jain) को प्लाज्मा थेरेपी (plasma therapy) दी गई है। स्थिति गंभीर होने के बाद उन्हें दिल्ली के मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया है। यहां सत्येंद्र जैन अभी भी आईसीयू में ऑक्सीजन स्पोर्ट पर है। सत्येंद्र जैन का उपचार कर रहे डॉक्टरों ने दिल्ली सरकार को बताया है कि प्लाजमा थेरेपी देने के उपरांत सत्येंद्र जैन का स्वास्थ्य पहले से बेहतर हुआ है। स्वास्थ्य (satyendar jain health) में लगातार बदलाव देखने को मिल रहा है।
सत्येंद्र जैन के एक करीबी मित्र ने कहा कि सत्येंद्र जैन को प्लाज्मा थेरेपी थेरेपी दी जा चुकी है, जिसके बाद उनका बुखार अब पहले से कम है। इसके अलावा अब उन्हें सांस लेने में भी पहले जितनी दिक्कत नहीं (satyendar jain health in hindi) है। डॉक्टरों की सलाह पर फिलहाल अगले 24 घंटे उनको आईसीयू में ही रखा जाएगा।
सत्येंद्र जैन पूर्वी दिल्ली के राजीव गांधी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में भर्ती थे। कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद यहां उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही थी साथ ही लगातार बुखार भी बना हुआ था। शुक्रवार को उनकी तबीयत बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें साकेत स्थित मैक्स अस्पताल के आईसीयू में स्थानांतरित कर दिया गया।
जैन अस्पताल में भर्ती हैं, ऐसे में उनकी अनुपस्थिति के कारण दिल्ली में कोरोना की रोकथाम एवं उपचार (Treatment and prevention of coronavirus in delhi) की जिम्मेदारी अब उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को दी गई है। जैन के पास फिलहाल कोई भी मंत्रालय नहीं है। जैन समेत अभी तक आम आदमी पार्टी के दिल्ली में चार विधायक कोरोना पॉजिटिव हो चुके हैं।
वर्ष 1918 में प्लाज्मा थेरेपी (Plasma Therapy ) का इस्तेमाल किया गया था। कारण था 1918 में हुआ स्पैनिश फ्लू महामारी। इस महामारी में कई लोगों की जान जा चुकी थी। तभी इलाज के लिए प्लाज्मा थेरेपी को डेवलप किया गया। इसके बाद से कई संक्रमित बीमारियों के इलाज में इस थेरेपी का इस्तेमाल किया जाता है। इस थेरेपी (Plasma Therapy) के जरिए जो भी इंसान अपने शरीर में हुए संक्रमण से लड़ने में सफल हो जाता है, उस व्यक्ति का खून दूसरे संक्रमित व्यक्ति के अंदर डाला जाता है। इस थेरेपी के जरिए मरीज लगभग 3-7 दिन में ठीक हो जाता है।