एलुमिनियम के बर्तन में खाना बनाना क्यों स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है?

एलुमिनियम के बर्तन में खाना जल्दी तो बन जाता है मगर इसके हानिकारक गुण का दुष्प्रभाव स्वास्थ्य को चुकाना पड़ता है।

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Written By: Mousumi Dutta | Updated : January 2, 2015 4:32 PM IST

पहले के जमाने में मिट्टी के बर्तन में खाना पकाया जाता था। धीरे-धीरे समय के साथ मिट्टी के बर्तन के जगह पर पीतल, काँसा, चाँदी, लोहा, एलुमिनियम और बाद में स्टील और नॉन-स्टिक कुकवेयर ने जगह ले ली। लेकिन इन सब में एलुमिनियम के बर्तन में खाना पकाना स्वास्थ्य के दृष्टि से सबसे खतरनाक होता है।

क्योंकि एलुमिनियम एक ऐसा भारी धातु होता है जो बाक्साइट धातु से बना होता है। खाना बनाते वक्त इसका कुछ कण खाने में मिल जाता है, जो धीरे-धीरे  पेट  में जमने लगता है। क्योंकि जिसप्रकार शरीर के दूसरे विषाक्त पदार्थ शरीर से मल-मूत्र के द्वारा बाहर निकल जाते हैं  उस तरह एलुमिनियम के कण शरीर से नहीं निकल पाते हैं। एलुमिनियम के यह विषाक्त कण लीवर, तंत्रिका तंत्र (nervous system) को क्षति पहुँचाने के साथ-साथ अस्थमा, तपेदिक, वात रोग होने के संभावना को बढ़ाने में मदद करते हैं। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि ये विषाक्त कण  मस्तिष्क को भी बूरी तरह से प्रभावित करते हैं जो धीरे-धीरे अल्जाइमर रोग का कारण बन जाता  है।

अतः खाना पकाने के लिए काँच, पीतल (कलई किया हुआ), स्टेनलेस स्टील के बर्तन का इस्तेमाल करना सुरक्षित होता है।

चित्र स्रोत: Getty images


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