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Written By: Mousumi Dutta | Published : October 30, 2014 6:32 PM IST
सिगरेट शरीर के लिए कितना हानिकारक होता है इसके बारे में तो सबको पता है। लोग इस कड़वी सच्चाई को जानने के बावजूद ध्रूमपान करना नहीं छोड़ते हैं। कुछ लोग तो ऐसे होते हैं जो सिगरेट पीना छोड़ना तो चाहते है मगर छोड़ नहीं पाते हैं। इस समस्या को नजर में रखते हुए इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट का निर्माण किया गया जो ध्रूमपान से होने वाले शारीरिक हानि को बचा पाने में सक्षम होता है।
इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट है क्या:
इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट असली सिगरेट का प्रतिरूप होता है जो असली सिगरेट के धुंए के जगह पर धुंध जैसा बनाता है और शरीर के लिए हानिकारक नहीं होता है क्योंकि इसमें न तो तम्बाकू होता है, न ही जलता है और न ध्रूमपान होता है। इसके जलने से वायु प्रदूषण भी नहीं होता है।
इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट में होता क्या है:
इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट कारतूस, ऐटमाइज़र (कणित्र), और बिजली की आपूर्ति के द्वारा चालित है। यह सिगरेट की तरह ही देखने में होता है। इसमें कारतूस तरल की तरह होता है। बिजली के द्वारा जलने के बाद ऐटमाइज़र जलन पदार्थ की तरह काम करता है और इसमें मौजुद तरल पदार्थ वाष्पीभूत हो जाता है। ई-सिगरेट निकोटिन जैसा वाष्प पैदा करता है जो असलियत में हवा में वाष्प के रूप में विलीन हो जाता है। कुछ ई-सिगरेट का फ्लेवर वैनिला और चॉकलेट जैसा होता है। इस बारे में बहुत लोगों का मानना है अपने बदले फ्लेवर के कारण अल्पवयस्कों को यह अपना आदि बना सकता है।
लोकप्रियता का कारण:
जो लोग सिगरेट पीना छोड़ना चाहते हैं उन लोगों की बात ध्यान में रख कर उत्पादकों ने ई-सिगरेट का निर्माण किया है। और सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें कैंसरकारी तत्व नहीं होता है, इसलिए स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नहीं होता है।
ई-सिगरेट को प्रतिबंध करने का कारण:
ई-सिगरेट में निकोटीन बहुत कम मात्रा में होता है और जिस रसायन का इस्तेमाल इसको बनाने के लिए किया जाता है उसके जलने पर वायु प्रदूषित भी होता है। ई-सिगरेट को घर के अंदर बैठकर नहीं इस्तेमाल किया जा सकता है। यह आस-पास के लोगों को भी हानि पहुँचाता है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इस सिगरेट से अल्पवयस्क ज़्यादा प्रभावित हो रहे हैं। इसलिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसके प्रचार और विक्रय पर प्रतिबंध लगाने की सलाह दी है।
ई-सिगरेट प्रतिबंध के विचार को भारत का समर्थन:
डॉ. हर्षवर्धन ने तम्बाकू के इस्तेमाल के खिलाफ अति सक्रिय उपायों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वह ई-सिगरेट और ऐसे सभी उत्पादों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के पक्ष में हैं जिन्हें इलेक्ट्रानिक निकोटिन डिलीवरी सिस्टम्स (ईएनडीएस) कहा जाता है। डॉ. हर्षवर्धन ने मंगलवार को बार्सिलोना (स्पेन) में फेफड़ों के स्वास्थ्य के बारे में 45वें यूनियन विश्व सम्मेलन में विश्व के तंबाकू नियंत्रण विशेषज्ञों को संबोधित करते हुए कहा कि ई-सिगरेट और इसी तरह के अन्य उत्पाद बच्चों में निकोटिन पर निर्भरता पैदा करते हुए उन्हें तम्बाकू के सेवन की तरफ ले जाते हैं।
. हर्षवर्धन ने कहा, ‘मुझे यकीन है कि यहां मौजूद सभी विशेषज्ञों को तंबाकू उद्योग की ताकत की जानकारी है। भारत इस चुनौती का मुकाबला करने के लिए अति सक्रिय उपाय करने के लिए प्रतिबद्ध है।‘ इस संबंध में उन्होंने हाल में भारत द्वारा सिगरेट के डिब्बों के बड़े हिस्से और अन्य किस्म के तंबाकू पर अनिवार्य चेतावनी लिखने के मामले में अन्य देशों के साथ पहला स्थान हासिल करने का जिक्र किया। नये नियमों के तहत तंबाकू के पैकेट के दोनों तरफ 85 प्रतिशत हिस्से में तस्वीर के रूप में स्वास्थ्य संबंधी चेतावनी देनी होगी। डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि उन्होंने भविष्य के लिए एक रोड मैप तैयार किया है जिसमें तंबाकू का उपयोग करने वाले उन लोगों को सलाह देने के लिए 24 घंटे की टेलीफोन हेल्पलाइन शुरू की जाएगी, जो इसे छोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसके अलावा वर्तमान वित्त वर्ष के दौरान राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर पांच तंबाकू परीक्षण प्रयोगशालाएं, 27 नये राज्य तंबाकू नियंत्रण प्रकोष्ठों की स्थापना और सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम, 2003 में संशोधन शामिल है ताकि इसे बेहतर तरीके से लागू किया जा सके।
स्रोत: IANS Hindi
चित्र स्रोत: Getty images
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