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Written By: Mousumi Dutta | Published : October 16, 2014 7:05 PM IST
हमेशा से ही फिल्म जगत की अभिनेत्रियाँ लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी रहती हैं। उनके जीवन के हर छोटे-बड़े पहलुओं के बारे में जानने के लिए लोग उत्सुक रहते हैं। इसलिए छोटी हो या बड़ी बात वे हर क्षेत्र में समालोचकों के लिए समालोचनाओं का केंद्र बनी रहती हैं। उनके सौन्दर्य, वज़न, नए-नए पहनावे का अंदाज़, चाल-ढाल हर क्षेत्र में उनकी समालोचना की जाती है।
सोनाक्षी सिन्हा का समालोचकों को जवाब:
अगर अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा की बात लें तो उन्होंने दबंग फिल्म में अभिनेत्री के रूप में आने के पहले 30 किलो वज़न घटाया था मगर तब भी समालोचकों के लिए समालोचना का केंद्र बनी ही रहीं। सबके मुँह पर एक ही बात है कि वह मोटी है और वज़न को घटाने के लिए कोई कोशिश क्यों नहीं करती है। इस क्षेत्र में दूसरी अभिनेत्रियाँ खुद को आकर्षक बनाने के लिए अपने खान-पान और व्यायाम पर ध्यान देती हैं और खुद को आकर्षक और दुबला बनाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा देती हैं। मगर सोनाक्षी सिन्हा ने अपने इस कमजोरी को दूसरों से न छुपाकर इसको ही अपने सौन्दर्य की शक्ति और आधार माना है। उन्होंने समालोचकों को जवाब देने के लिए ‘इन्सटाग्राम’ पर एक कंकाल की छवि पोस्ट करके यह बताया कि नारी का असली रूप यही है। उन्होनें इस छवि के द्वारा समालोचकों को यह संदेश दिया कि वह इस कंकाल की तरह नहीं बनना चाहती हैं, उन्होंने अपना सही वज़न पा लिया है। जो लोग उनके वज़न को लेकर समालोचना करते हैं कि वे उनके वज़न के बारे में बात करना भूल जायें। इस बात से यह पता चलता है सोनाक्षी सिन्हा दूसरे अभिनेत्रियों की तरह दुबली बनने की चाह नहीं रखती हैं बल्कि उन्हें अपने शारीरिक गठन पर नाज़ है। वे समालोचको के लिए खुद को बदलना नहीं चाहती हैं। यह उनके दृढ़ स्वभाव और सकारात्मक दृष्टिकोण को दर्शाती हैं।
पहले भी कई अभिनेत्रियाँ वज़न बढ़ जाने पर समालोचकों के तीर का निशान बन चुकीं है। जब अभिनेत्री और विश्व सुंदरी ऐश्वर्या राई का माँ बनने के बाद वज़न नहीं घटा, तब उनपर ‘गोल बच्चन’ के नाम से व्यंग्य किया गया।
नारी का भीतरी सौन्दर्य ही उसका असली सौन्दर्य है:
लेकिन सच बात तो यह है कि नारी का असली सौन्दर्य उसका बाहर का सौन्दर्य नहीं है उसके भीतर का सौन्दर्य है। यह सिर्फ अभिनेत्रियों की बात नहीं है यह हर उस नारी पर लागु होता है जिन्हें खुद पर भरोसा होता है। जिनका दिल अच्छा होता है वह खुद ब खुद सुंदर लगने लगती हैं, चाहे वह मोटी हो या दुबली। जिन्हें अपने शारीरिक गठन पर शर्मिंदगी महसूस होने लगती हैं, उनका खुद पर आत्मविश्वास खो जाता है और वे तनाव औेर अवसाद के स्थिति में पहुँच जाती है। जिससे खुद ब खुद उनके शरीर से प्राकृतिक सौन्दर्यता खो जाती है। जो नारी अपने शरीर के खामियों को सकारात्मक दृष्टि से देखती हैं वे अपने जिंदगी को सकारात्मक राह की ओर ले जाने में सक्षम हो पाती हैं और जीवन के हर क्षेत्र में सफल हो पाती हैं।
अपने शरीर के छवि (body image) को कैसे संभालेंगे:
रचेल हर्कमैन, मनोचिकित्सक के अनुसार आप जैसी है वैसे ही सबसे सुंदर हैं। अगर आपके शारीरिक बनावट को लेकर परिवार, दोस्त, या रिश्तेदार समालोचना कर रहे हैं तो आपको पूरे भरोसे से इस बात का जवाब देना चाहिए कि आप जैसी हैं वैसी ही सबसे सुंदर हैं। आपकी खुद की सकारात्मक शक्ति आपको सभी प्रकार के आलोचनाओं का सामना करने की शक्ति प्रदान करेगी जिससे आपके मन की आन्तरिक सौन्दर्यता आपके बाहरी सौन्दर्यता पर झलकेगी।
खुद को सौन्दर्य समझने का टिप:
आप खुद को आईने के सामने खड़े होकर देखें। अगर आपको अपने शरीर का कोई अंग बेढंगा लग रहा है तो यह सोचे कि आपका असली सौन्दर्य शरीर के इस बेढ़गेपन से कहीं अलग और सुंदर है। आप खुद को सुंदर सोचें और आपकी अपनी यही सकारात्मक दृष्टिकोण आपको खुद से प्यार करना सीखा देगी।
चित्र स्रोत: Getty Images
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