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Written By: Mousumi Dutta | Published : October 29, 2014 7:07 PM IST
सूर्य के प्रति आस्था और श्रद्धा ज्ञापन करने का एकमात्र महापर्व छठपूजा है। इस पूजा की विशेष बात यह है कि पुरूष और नारी दोनों छठ पूजा करते हैं। बिहार औेर उत्तरप्रदेश में सामान्यतः यह पूजा की जाती है।
लोक आस्था का महापर्व छठ मूलतः चार दिनों तक चलता है। इस अनुष्ठान का दूसरा दिन 'खरना' के साथ ही पूरा माहौल भक्तिमय हो जाता है। सूर्यभक्ति में सराबोर व्रतियाँ सूर्यास्त के बाद प्रसाद बनाकर खरना करते हैं। खरना के साथ ही व्रतियों का 36 घंटे तक का निर्जला उपवास शुरू हो जाता है। गंगा तटों पर व्रती बड़ी संख्या में एकत्र होकर सूर्य की अराधना करते हैं। व्रती स्नान कर मिट्टी के बने चूल्हे में आम की लकड़ी जलाकर गुड़ में बनी खीर और रोटी बनाकर भगवान भास्कर की पूजा कर भोग लगाते हैं । इस गुड़ से बने खीर को 'रसियाओ' कहते हैं । खरना को 'लोहड़ा' भी कहा जाता है। यह पर्व मूलतः नहाय-खाय से शुरू हो जाता है। इसके तहत व्रती महिलाएं-पुरुष अस्ताचलगामी (डूबते हुए) सूर्य की पूजा करते है और अघ्र्य देते हैं। अगले दिन व्रती उदीयमान (उगते हुए) सूर्य को अघ्र्य देने के बाद व्रत का समापन करते हैं। अस्ताचलगामी सूर्य को तीन बार अघ्र्य दिया जाता है। रात्रि जागरण के पश्चात उगते सूर्य को फिर से इसी तरह से अघ्र्य दिया जाता है।
इस साल 30 अक्टूबर की सुबह में उगते सूर्य को अघ्र्य देकर छठ पूजा का समापन किया जाएगा। इसके बाद व्रती प्रसाद खाकर व्रत खोलेंगे। श्रद्धालु सूर्य की पूजा अपने परिवार की समृद्धि और कष्ट के निवारण के आशय से करते हैं।
उपवास तोड़ने के बाद श्रद्धालुओं के लिए आहार-योजना:
स्रोत: IANS Hindi
चित्र स्रोत: Getty images
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