वायरल फीवर से राहत पाने के छह घरेलु उपचार

WrittenBy

Written By: Mousumi Dutta | Published : December 5, 2014 11:18 AM IST

वायरल फीवर साधारणतः मौसम के बदलने के समय होता है। जब भी मौसम बदलता है तब तापमान के उतार-चढ़ाव के कारण शरीर का प्रतिरक्षी तंत्र (immune system) थोड़ा कमजोर हो जाता है जिसके कारण वायरस से शरीर जल्दी संक्रमित (infected) हो जाता है।

वैसे तो वायरल फीवर के लक्षण अन्य आम फीवर के तरह ही होते हैं मगर इसको नजर अंदाज करने पर अवस्था गंभीर हो सकती है। फीवर होने के प्रथम अवस्था में गले में दर्द, थकान, खाँसी आदि होता है। जिसको लोग नजरअंदाज कर देते हैं, और इसी नजर अंदाज के कारण वायरस को पनपने में आसानी होती है। पढ़े:  डेंगू: कारण, लक्षण और बचने के उपाय

जब शरीर वायरस से संक्रमित होता है तब शरीर में यह लक्षण नजर आते हैं-

• थकान

• मांसपेशियों या बदन में दर्द

• तेज बुखार

• ग्रस्नी ( pharynx) में सूजन

• सर्दी

• गले में दर्द

• सर दर्द

• आँखो में लाली और जलन का अनुभव

• खाँसी

• जोड़ो में दर्द

• दस्त (diarrhea)

• त्वचा के ऊपर रैशज़

वैसे तो वायरल फीवर से लड़ने के लिए डॉक्टर एन्टीबायोटिक (antibiotic), एस्पिरिन (aspirin) और पेरासिटामोल (paracetamol) जैसे दवाईयाँ देते हैं, जिससे जल्द राहत मिल जाती है। लेकिन घरेलु उपाय के द्वारा भी इससे राहत मिल सकता है, वह भी बिना किसी पार्श्व प्रभाव(side effect) के।

धनिया चाय- धनिया में फाइटोनूट्रीअन्ट (phytonutrients) और विटामिन होता है जो प्रतिरक्षी तंत्र को उन्नत करने में बहुत सहायता करता है। धनिया प्राकृतिक तरीके से वायरल फीवर से लड़ने में मदद करता है।

बनाने की विधि:

एक गिलास पानी में एक बड़ा चम्मच धनिया के दाने डालें और उसको थोड़ा उबाल लें। उसके बाद कप में छानकर स्वाद के अनुसार थोड़ा-सा दूध और चीनी डालकर पीने से बुखार से राहत मिलता है।

सोआ का काढ़ा- यह शरीर के प्रतिरक्षी तंत्र को तो उन्नत करता ही है साथ ही बुखार को कम करने में भी सहायता करता है। फल्वेनॉयड (flavonoids) और मोनोटर्पीन (monoterpenes) के गुण होने के कारण यह फीवर से राहत दिलाने में मदद कर पाता है।

बनाने की विधि:

एक कप पानी में एक बड़ा चम्मच सोआ के दाने, एक छोटा चम्मच काली मिर्च और एक छोटा चम्मच कलौंजी डालकर दस मिनट तक उबालें। उबालने के बाद एक कप में छान लें और उसमें एक चुटकी दालचीनी का पावडर डालकर अच्छी तरह से मिला लें। काढ़ा को पीने से बुखार से राहत मिलेगी।

तुलसी- तुलसी का एन्टी बायोटीक (anti-biotic) और एन्टी बैक्टिरीअल (anti bacterial) गुण वायरल फीवर के लक्षणों से राहत दिलाने में बहुत मदद करते हैं।

बनाने की विधि:

बीस ताजा तुलसी के पत्तों को एक लीटर पानी में एक चम्मच लौंग पावडर डालकर तब तक उबालें जब तक कि वह सुख कर आधा न हो जाये। उसके बाद उसको छानकर हल्का ठंडा करके दो घंटा के अंतराल में पीयें।

कन्जी (rice starch)- उपचार का यह तरीका बहुत पुराना है। यह शरीर से विषाक्त पदार्थ को निकालने में बहुत मदद करता है। जिससे प्रतिरक्षी तंत्र को वायरस से लड़ने में शक्ति मिलती है। कन्जी पौष्टिकता से भरपूर होता है इसलिए इसके सेवन से रोगी को शक्ति मिलती है।

सूखे अदरक का मिश्रण- अदरक के अनगिनत स्वास्थ्य संबंधी गुण होते हैं। इसका एन्टी- इन्फ्लैमटोरी और एन्टी-ऑक्सिडेंट गुण बुखार के लक्षणों से राहत दिलाने में सहायता करते हैं। पढ़े:  प्राकृतिक और घरेलु तरीके से रक्त में हिमोग्लोबिन (hemoglobin) की मात्रा बढ़ायें

बनाने की विधि:

सूखा अदरक, एक छोटा चम्मच हल्दी और एक छोटा चम्मच काली मिर्च का पावडर और थोड़ा-सा चीनी एक कप पानी में डालकर तब तक उबालें जब तक कि सुखकर आधा न हो जाये। दिन में चार बार इस काढ़े को पीने से बुखार से राहत मिलता है।

मेथी का जल- मेथी में बहुत सारे औषधिय गुण होते हैं जो वायरल फीवर के कष्टों से राहत दिलाने में सहायता करते हैं। पढ़े:  मेथी के 15 स्वास्थ्यवर्द्धक गुण

बनाने की विधि: एक कप पानी में एक बड़ा चम्मच मेथी के दाने रात भर भिगोकर रखें। अगले दिन सुबह इसको छानकर निश्चित अंतराल में इसका सेवन करें। सुबह मेथी के दाने, नींबू का रस और शहद के मिश्रण का सेवन करने से भी कुछ हद तक बुखार से राहत मिलता है।

चित्र स्रोत: Getty images


लेटेस्ट अप्डेट्स के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो कीजिए।स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के लिए न्यूजलेटर पर साइन-अप कीजिए।

Add The Health Site as a Preferred Source Add The Health Site as a Preferred Source