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Written By: Mousumi Dutta | Published : September 12, 2014 5:13 PM IST

मधुमेह की बीमारी में शरीर रक्त में ग्लूकोज़ की मात्रा को नियंत्रित नहीं कर पाता है। जब यह नियंत्रण के बाहर चला जाता है तब धीरे-धीरे शरीर के सभी अंगों को प्रभावित करने लगता है। इस बीमारी से आंखें सबसे ज़्यादा प्रभावित होते हैं। यहाँ तक कि चालिस साल के उम्र के बाद लोग मधुमेह के कारण अंधे भी हो जाते हैं। इस रोग को मधुमेह रेटिनोपैथी कहते हैं।
वैसे तो मधुमेह रेटिनोपैथी का कोई विशेष लक्षण नहीं होता है जिससे कि आप पहले से कुछ जान सके। लेकिन अपनी आंखो की लगातार जाँच के द्वारा इस बीमारी का पता लगा सकते हैं। डॉक्टर आंखो में ड्रॉप डालकर रेटिना को पास से देखते है और उसके बाद ही पता लगा पाते हैं कि आंख मधुमेह रैटिनोपैथी से ग्रस्त हुआ है कि नहीं।
मधुमेह रेटिनोपैथी है क्या?
डॉ. प्रकाश नायक (नवी मुम्बई आई क्लीनिक) के अनुसार मधुमेह के कारण आंखो की रक्त धमनी के क्षतिग्रस्त हो जाने के कारण यह बीमारी होती है। पहले से इसका कोई लक्षण नजर नहीं आता है। बीमारी जब अपने चरम अवस्था में पहुँच जाती है तब आंखो में रक्त के थक्के बनने लगते हैं। मधुमेह रेटिनोपैथी के चार अवस्थाएं होती हैं- प्रथम तीन अवस्था में मधुमेह ग्रस्त रोगी अपने ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, और ब्लड कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करके रेटिनोपैथी को रोक सकते हैं। यह बीमारी जब चौथे अवस्था में पहुँच जाती है तब इसको प्रोलिफेटिव रेटिनोपैथी या नियो-वसकुलर ग्लुकोमा भी कहते हैं। इस अवस्था में आंखो का रक्त चाप बहुत बढ़ जाता है जिसके कारण आंखों की रोशनी चली जाती है।
आप इस अवस्था को कैसे पहचानेंगे?
प्रथम अवस्था में इसका कोई लक्षण नजर नहीं आता है। सिर्फ रेटिना के सतह पर रक्त के छोटे-छोटे थक्के नजर आते हैं। लेकिन बीमारी जब अपने चरम अवस्था में जाने लगती है तब आंखो की रोशनी भी धीरे-धीरे जाने लगती है। आंखों का रक्त चाप 17-20 एम.एम. एच.जी. (17-20 mm Hg) होना चाहिए। रेटिनोपैथी के आखिरी अवस्था में आंखो का रक्त चाप बढ़ जाने के कारण आंखो बहुत दर्द होता है जिसके कारण आंखो की रोशनी चली जाती है।
रेटिनोपैथी के उपचार के विकल्प क्या है?
डायबीटिक माइकोलीपैथी को रोकने के लिए इन्ट्रावाइट्रियल स्टेरॉयड इंजेक्शन दिया जाता है। रेटिनोपैथी के प्रथम अवस्था में लेज़र ट्रीटमेंट किया जाता है। आखिरी अवस्था में सर्जरी यानि शल्य प्रक्रिया किया जाता है जिसको विकट्रेक्टोमी ( आंखो से रक्त का थक्का हटाया जाता है) कहते हैं। सर्जरी के बाद लेज़र ट्रीटमेंट भी किया जाता है। रेटिना से अत्यधिक मात्रा में रक्त निकलने पर सर्जरी के बाद इंजेक्शन भी दिया जाता है।
लेकिन सबसे ज़रूरी बात यह है कि मधुमेह ग्रस्त रोगी को ग्लूकोज़ को नियंत्रण में रखना होगा, नियमित रूप से व्यायाम करना पड़ेगा, वज़न को बढ़ने से रोकना पड़ेगा, साथ ही सक्रिय जीवनशैली को अपनाना पड़ेगा, तभी मधुमेह रेटिनोपैथी को रोक पाने में कुछ हद तक समर्थ हो पायेंगे। पढ़े:मधुमेह पर लगाम कसने के दस बेहतरीन योगासन
चित्र स्रोत: Getty Images
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