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Written By: Mousumi Dutta | Published : October 20, 2014 7:04 PM IST
भारत के लिए दिवाली प्रकाश और उल्लास का त्योहार होता है। लेकिन आपके किसी असावधानी के कारण उल्लासभरा त्योहार अंधेरे का त्योहार न बन जाय। इसके लिए आपको कुछ बातों का ध्यान रखना पड़ेगा। दिवाली का प्रधान आकर्षण पटाखें होते हैं, मगर इन पटाखों के कारण ध्वनी और वायु प्रदूषण फैलता है जो दमा, हृदय रोग, फेंफड़ों से संबंधित बीमारियों आदि के घातक हो जाता है। इन पटाखों से त्वचा और आँखों को भी नुकसान पहुँचता है।
कुछ ज़रूरी सुरक्षा की बातें:
दिवाली के पटाखों से हानि पहुँचने का सबसे ज़्यादा भय बच्चों को होता है। इसलिए पटाखें जलाने से पहले उन्हें सूती कपड़े पहनायें और आप भी पहनें। पटाखें बड़ों के निगरानी में ही जलाने दें। पटाखों को जलाने के लिए अगरबत्ती का इस्तेमाल करना सुरक्षित होता है। पटाखों को जलाते समय उसके ऊपर पूरी तरह झुक न जायें या जले हुए पटाखों को हाथ से न पकड़ें। कभी-कभी अधजले पटाखों को बच्चे या बड़े भी हाथ में पकड़ लेते हैं लेकिन उनके फटने की आंशका सबसे ज़्यादा होती है। इसलिए इन गलतियों को न करें।
वयस्क लोग जिन्हें दमा या फेफड़ा संबंधी बीमारियाँ होती हैं उन्हें बाहर निकलते समय मास्क पहनना चाहिए। कान के पर्दे को कोई नुकसान न पहुंचे, इसके लिए लोगों को ईयरफोन लगा लेना चाहिए। कभी-कभी पटाखों के धुएं से आँखों में जलन होती है, उसके लिए आँखों को न रगड़ें बल्कि साफ़ पानी से धो लें और आँखों में ड्रॉप (eye drop) डालें। इनहेलर की व्यवस्था कर लें, क्योंकि दिवाली में बुजुर्गो को कभी भी इसकी जरूरत पड़ सकती है। किसी भी दुर्घटना से बचने के लिए प्राथमिक चिकित्सा की व्यवस्था पास ही रखें। अगर किसी भी असावधानी के कारण कपड़ों में आग लग जाती है तो कंबल से उसको लपेट दें जिससे तुरन्त आग बुझ जाये।
पटाखे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक:
पटाखे सल्फर, नाइट्रेट्स, कार्बन सोडियम और पोटैशियम के अपमिश्रण होते हैं जो हवा में घुलकर वातावरण को प्रभावित करते हैं। ये रसायन आपके स्वास्थ्य के लिए घातक होते हैं। जौनपुर जिला के क्षय रोग चिकित्सालय में वक्ष एवं फेफड़ा रोग विशेषज्ञ डॉ. अतुल श्रीवास्तव की सलाह है कि जिन्हें फेफड़े से संबंधित बीमारियां हैं, उन्हें आतिशबाजियों से दूर रहना चाहिए। डॉ. श्रीवास्तव की राय है कि जिन लोगों को सांस संबंधी परेशानी जैसे सीओपीडी, अस्थमा, एलर्जी सहित फेफड़े से संबंधित अन्य बीमारियां हैं, उन्हें आतिशबाजियों से बिल्कुल दूर रहना चाहिए। कम आवाज वाले पटाखें जलाने चाहिए ताकि ध्वनि प्रदूषण कम हो और कानों को किसी भी तरह से नुकसान न पहुँचें। तेज आवाज वाले पटाखें जलाना बीमार व कमजोर दिल के लोगों के लिए घातक होता है। कभी-कभी यह जानलेवा भी बन जाता है।
स्वास्थ्य संबंधी टिप:
कभी भी दूध या खोये से बनी मिठाइयां न तो खाएं और न ही किसी को उपहार में दें, क्योंकि ये दिवाली से काफी दिन पहले के बने होते हैं।
दिवाली टिप:
• ज़्यादा ढीले-ढाले या नाइलॉन तथा टेरिकॉटन से बने कपड़े नहीं पहनें बल्कि सूती कपड़े पहनें।
• खुले जगह पर पटाखें जलायें।
• घर मे दीप जलाते वक्त सामान का ध्यान रखें। दीपों को सामान के पास न रखें जिससे कि आग लगने संभावना से बचा जा सके।
• जले हुए जगह पर बर्फ लगायें।
• आग को बुझाने के लिए बाल्टी भर कर पानी और बालू रखें ताकि आग को जल्द से जल्द बुझाया जा सके।
दीपों का त्योहार आपके लिए सुरक्षित और मंगलमय हो।
चित्र स्रोत: Getty Images
स्रोत: IANS Hindi
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