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Top Cause of Body Ache: बदन दर्द की समस्या रोज़मर्रा की ज़िंदगी में अक्सर लोगों को महसूस होती ही है। छोटे-बच्चे हों या बुज़ुर्ग हर उम्र के लोगों को इस परेशानी से दो-चार होना ही पड़ता है। चूंकि, बदन दर्द बार-बार होने वाली समस्या है, और कई बार थोड़ा आराम करने या मालिश कराने से यह ठीक हो जाती है। इसीलिए, आमतौर पर लोग इसे मामूली-सी बात समझकर नज़र अंदाज ही कर देते हैं। यही नहीं लोग अक्सर, इस समस्या के लिए डॉक्टरी मदद भी तभी लेते हैं जब समस्या बहुत गम्भीर हो जाती है। लेकिन, एक्सपर्ट्स की मानें तो बदन दर्द को छोटी-सी समस्या मानकर उसकी तरफ ध्यान ना देना आपके लिए एक बड़ी ग़लती साबित हो सकता है। क्योंकि बदन दर्द कई गम्भीर बीमारियों का शुरूआती लक्षण भी होता है। यहां पढ़ें कि क्यों बदन दर्द एक सामान्य समस्या नहीं है। साथ ही जानें इस समस्या के कारण, लक्षण और सही उपचार। लेकिन, उससे पहले जानते हैं कि बदन दर्द कितने प्रकार के होते हैं।
• सिर दर्द (Headache)
• गर्दन में दर्द (Neck Pain)
• पीठ में दर्द (Back Pain)
• मांसपेशियों में दर्द (Muscles Pain)
• जोड़ो में दर्द (Joint Pain)
• तंत्रिकाविकृतिय दर्द (neuropathic pain)
जब तंत्रिका तंत्र अच्छी तरह से काम नहीं कर पाता है तब बदन में दर्द होना शुरू हो जाता है। इसलिए इस तरह के दर्द से राहत पाने के लिए डॉक्टर से सलाह लेना ज़रूरी होता है। बहुत कम लोगों को ही मालूम है कि बदन में दर्द होता क्यों है, इसलिए चिकित्सा के साथ-साथ बदन दर्द के कारणों के बारे में भी जानना ज़रूरी होता है-
बिल्कुल, इसको नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कभी-कभी बुखार या फ्लू (flu) के दौरान मांसपेशियों (muscles) और जोड़ों में बहुत दर्द होता है। लेकिन दर्द के साथ दूसरे लक्षण भी नजर आ सकते हैं, जैसे-
• बुखार
• जोड़ों में दर्द
• दर्द के कारण नींद न आना
• कमजोरी के कारण बीमार जैसा महसूस करना
इस रोग के कारण पूरे शरीर में दर्द होने के साथ-साथ, थकान और सोने में परेशानी होती है जो रोगी को हमेशा अस्वस्थ-सा महसूस कराता है। इस लक्षणों के अलावा भी दूसरे लक्षण हैं-
• सूजन
• मांसपेशियों में अकड़न
• अवसाद
• तनाव
• पेट में गड़बड़ी
• बार-बार मनोभाव में बदलाव
• माइग्रेन
• जबड़ा या चेहरे के मांसपेशियों में समस्या
• मूत्राशय (bladder) में दर्द
• प्रोस्टेट ग्रंथि (prostate gland) और पेल्विक (pelvic) में दर्द
अगर आपको इन सब लक्षणों का सामना करना पड़ रहा है तो डॉक्टर के पास जाना बुद्धिमानी का काम होगा।
डॉक्टर से सलाह लेने पर वे दर्द को कम करने वाली दवाईयाँ देगें। इसके अलावा अगर आप व्यायाम, संतुलित आहार, तनाव को कम करने वाले मालिश, योगासन आदि का सहारा लेंगे तो आपको इस दर्द से आसानी से राहत मिल जाएगी।
इसके लक्षण भी आम बदन दर्द जैसे ही होते हैं। जब किसी को ज़रूरत से ज़्यादा थकान हो जाता है तब इस बीमारी का शिकार हो जाते हैं। लेकिन सबसे मुश्किल की बात यह है कि आराम करने पर भी इसके लक्षणों से राहत मिलना मुश्किल हो जाता है। इसलिए डॉक्टर से तुरन्त सलाह लेना ज़रूरी होता है।
लाइम बीमारी ब्रोरेलिया बर्गडोरफेरी (Borrelia burgdorferi ) जीवाणु के कारण होता है, जो टिक (blacklegged tick) के काटने के कारण होता है। अगर आपको निम्न लक्षण नजर आ रहे हैं तो तुरन्त उपचार की ज़रूरत है-
• बहुत थकान
• तेज़ सिर दर्द
• मांसपेशी और हड्डी दोनों में प्रचंड दर्द
• जोड़ों में दर्द और अकड़न
• एकाग्रता में कमी
• यादाश्त में कमी
• अच्छी तरह से नींद न आना आदि
एन्टीबायोटिक दवा के द्वारा इसके लक्षणों से राहत मिल जाती हैं। लेकिन स्थिति बहुत खराब हो जाने पर हृदय के धड़कन में अनियमितता, मस्तिष्क के कार्य-कलाप और तंत्रिका-तंत्र में भी समस्या उत्पन्न हो जाती है। इन सब लक्षणों के अलावा भी अगर आपकी आंखे बहुत लाल हो गई हैं तो तुरन्त डॉक्टर के पास जाये क्योंकि घास में चलने के कारण आपको टिक ने संभवतः काटा है, इसलिए ये लक्षण नजर आ रहे हैं।
तनाव के कारण भी आपको शरीर में लगातार दर्द का अनुभव हो सकता है। कुछ लक्षण इस प्रकार हैं-
• सिरदर्द
• मांसपेशियों में दर्द
• सीने में दर्द
• थकान
• नींद में समस्या
• पेट में गड़बड़ी
उपचार:
अगर आपको पता चल रहा है कि यह सब तनाव के कारण हैं तो तनाव से राहत पाने के जल्द से जल्द उपाय करें। फिर भी यदि आप लक्षणों को कम नहीं कर पा रहें हैं तो डॉक्टर से सलाह लें।
आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि विटामिन डीकी कमी से भी बदन में दर्द होता है। आजकल काम में व्यस्तता में लोग सूर्य के किरणों से संपर्क में कम आते हैं जिसके कारण उनमें विटामिन डी की कमी हो जाती है। अमेरिकन जरनल ऑफ क्लिनिकल न्यूट्रीशन के अध्ययन के अनुसार शरीर में विटामिन डी की कमी होने के कारण शरीर खाने में से कैल्सियम को 10-15% ही सोख पाता है। कैल्सियम हड्डियों को सख्त और स्वास्थ्यवर्द्धक बनाने के लिए ज़रूरी होता है, जो विटामिन डी की कमी के कारण संभव नहीं हो पाता है। परिणाम स्वरूप बदन में दर्द जैसे समस्याओं से जुझना पड़ जाता है। विटामिन डी के कमी से जो लक्षण नजर आते हैं वे हैं-
• हमेशा थकान महसूस होना
• हड्डियों में दर्द
• कमजोरी
• चोट लगने पर हड्डियों के टूटने का कारण
उपचार:
विटामिन डी के सप्लीमेट्स( vitamin D supplements) और संतुलित आहार (balanced diet) के सेवन से इसके कमी को पूरा किया जा सकता है।
रोग #6: रक्त में आयरन की कमी
रक्त में आयरन की कमी को एनीमिया कहते हैं। जब रक्त में आयरन की कमी हो जाती है तब शरीर को इस अवस्था का सामना करना पड़ता हैं। इसके कमी से शरीर को ऑक्सीजन और पौष्टिकता की प्राप्ति कम हो पाती है जिसके कारण शरीर को थकान और दर्द का अनुभव होता है। दूसरे लक्षणों में-
• मांसपेशियों में दर्द
• बेजान त्वचा और नाखून
• मासिक धर्म (menstruation) के दौरान रक्तस्राव ज्यादा होना
• चिड़चिड़ापन
• असहनशीलता आदि
डॉक्टर के सलाहानुसार आयरन वाले दवाईयों और सिरप का सेवन करने से इसके कमी को पूरा किया जा सकता है। दवाईयों के अलावा स्वस्थ जीवनशैली और आयरनयुक्त खाद्दपदार्थ का सेवन करने से भी आयरन को कमी को कम किया जा सकता है।
इस अवस्था में सबसे ज़्यादा मेरूदण्ड (spinal cord) और मस्तिष्क प्रभावित होते हैं। इससे तंत्रिका (nerves) और मस्तिष्क प्रभावित होने के कारण लोगों को हर वक्त दर्द का अनुभव होता है। इसके अलावा दूसरे लक्षण जो नजर आते हैं, वे हैं-
• कमजोरी
• अचानक झनझनाहट जैसे दर्द का अनुभव
• अंगों का सुन्न हो जाना
• साफ नजर न आना
• मांसपेशियों में अकड़न
• मूत्र में समस्या आदि
उपचार:
अगर इसका उपचार समय पर नहीं किया गया तो अवस्था और भी गंभीर हो सकती है।
इस तरह के गठिया संबंधी रोग में दो हड्डियों के बीच में उपास्थि (cartilage) की मात्रा कम हो जाती हैं जिसके कारण हड्डियों के घर्षण से दर्द का अनुभव होता है। जिसके कारण बदन में प्रचंड दर्द का सामना करना पड़ता है। दूसरे लक्षणों में-
• जोड़ो में अकड़न और सूजन
• पीठ, नितंब (hips) और हाथ में दर्द
• सुबह और ज़्यादा काम करने के कारण प्रचंड दर्द का अनुभव
इस बीमारी के कारण तंत्रिका को बहुत क्षति पहुँचती है, जिसके कारण पूरे शरीर में बहुत दर्द होता है। इसके अलावा-
• मांसपेशियों में दर्द
• झनझनाहट जैसे दर्द का अनुभव
• मांसपेशियों में ऐंठन आदि
रोग #10: दूसरे विकार या बीमारियाँ
• लूपस (lupus)
• संधिवात गठिया (rheumatoid arthritis)
• पेट में जलन (viral gastroenteritis)
• बुखार (flu)
• तपेदिक (tuberculosis)
• कैंसर
• शरीर के जिस अंग में दुर्घटना के कारण चोट पहुँचा हैं वहाँ जाड़े में या ठंड में दर्द बढ़ता है
• उम्र के साथ दर्द बढ़ता है आदि
डॉ. आशिष गोयल ( डिपार्टमेंट ऑफ मेडिसन, एम्स, न्यू दिल्ली) का कहना है कि अगर तपेदिक और कैंसर का इलाज करने के छह से आठ हफ़्तों में कोई विशेष सुधार नजर नहीं आता हैं तो अवस्था और भी बिगड़ सकती है और मृत्यु का कारण भी बन सकती है। इसलिए बदन दर्द के लक्षणों को नजरअंदाज न करें और तुरन्त चिकित्सक से सही सलाह लेकर इलाज करना शुरू करें।