क्‍या आपने भी शरीर को बना रखा है गोदाम

जीवनशैली की खराब आदतें मुश्किल कर देती हैं जीवन में आपकी राह।

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Written By: Yogita Yadav | Updated : September 28, 2018 8:42 AM IST

आपका शरीर आपका सबसे प्‍यारा दोस्‍त, ताउम्र साथ रहने वाला साथी है। इसके बावजूद आप उससे ऐसे व्‍यवहार करते हैं जैसे कोई अपने दुश्‍मन से करता है। न आपको उसका ख्‍याल है और न ही आप उस पर ध्‍यान देते हैं। घर-दफ्तर , टारगेट और ख्‍वाहिशों के बीच क्‍या आपने भी अपने शरीर को बना दिया है गोदाम।

अपने तंत्र को साफ रखें

यही कारण है कि हम सभी प्रजातियों से निराले हैं। अगर आपको अपनी परवाह है तो आपको सजग होना चाहिए कि आपका तंत्र क्या ग्रहण कर रहा है। सवाल यह नहीं कि आप कितने लंबे समय तक जीते हैं। सवाल यह पैदा होता है कि आप कितने अच्छे से जीवन जीते हैं। आप क्या सुनते हैं, क्या कहते हैं और क्या खाते हैं ; इन सबका अभ्यास योग में किया जाता है क्योंकि वातावरण, जीभ और मन व शरीर को पवित्र बनाए रखने से, आपको अपने अस्तित्व के लिए निश्चित आजादी, बुद्धिमानी व आनंद मिल सकता है।

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करें सहयोग

मनुष्य का स्वभाव ऐसा है कि जहाँ हर दूसरा जीव अपने आस पास के हालात के अनुसार खुद को ढाल लेता है, वहीँ मनुष्य अपने हिसाब से हालात रच सकता है। आप क्या सुनते हैं, क्या कहते हैं और क्या खाते हैं ; इन सबका अभ्यास योग में किया जाता है क्योंकि वातावरण, जीभ और मन व शरीर को पवित्र बनाए रखने से, आपको अपने अस्तित्व के लिए निश्चित आजादी, बुद्धिमानी व आनंद मिल सकता है।

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समझें इसकी जरूरतें

क्‍या आपने कभी ट्रक में साइकिल का पहिया लगाया है या कभी जमीन पर बिछाए जाने वाले गलीचे को सिर पर रखा है, नहीं न तो फि‍र शरीर के साथ भी ऐसा न करें। ध्‍यान दें कि शरीर कब थक रहा है, कब उसे खुराक चाहिए और कब आराम। जमाने का चलन देखकर उस पर अत्‍याचार न करें। वह दुकान का शोरूम नहीं आपका साथी है। इसे प्‍यार से इसी के अनुसार रखें। तब देखिए यह किस तरह आपका साथ निभाता है।

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