2 टाइप की जॉब करने वाले पुरुषों का स्पर्म-काउंट होता है High! हार्वर्ड के वैज्ञानिकों ने बताया कौन सा पेशा सही

अध्ययन में पाया गया कि वे पुरुष, जो नियमित रूप से भारी-भरकम सामान या वस्तु उठाते हैं उनमें स्पर्म कंसनट्रेशन 46 फीसदी ज्यादा था।

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Written By: Jitendra Gupta | Published : March 9, 2023 5:54 PM IST

अगर आपसे कोई कहे कि आपका प्रोफेशन ऐसा है, जिसमें आपके फर्टिलिटी तो बूस्ट होती है साथ ही आपका स्पर्म काउंट भी और बेहतर हो जाता है तो? जी हां, हार्वर्ड के वैज्ञानिकों ने एक स्टडी में इस बात का खुलासा किया है कि शारीरिक रूप से बहुत ज्यादा मेहनत वाले प्रोफेशन में लगे पुरुषों का स्पर्म काउंट दूसरे पेशे में काम करने वाले पुरुषों की तुलना में बहुत बेहतर होता है। इसका मतलब ये है कि वे पुरुष, जो नियमित रूप से बहुत ज्यादा भारी सामान उठाते हैं उनमें अधिक स्पर्म बनता है।

हार्वर्ड के ब्रिघम एंड वुमेन्स हॉस्पिटल में हार्वर्ड टीएच चैन स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ एंड मास जनरल ब्रिघम के शोधकर्ताओं द्वारा की गई ये स्टडी जर्नल ह्यूमन रिप्रोडक्शन में प्रकाशित हुई है। इस स्टडी को फर्टिलिटी पर पर्यावरणीय और जीवनशैली कारकों के प्रभाव का पता लगाने के लिए किया गया था।

क्या कहती है रिसर्च

इस स्टडी में फर्टिलिटी सेंटर में इलाज करा रहे दंपत्तियों में से 377 पुरुषों को शामिल किया गया था। ये स्टडी इस बात का पता लगाने के लिए की गई थी कि क्या पेशेवर और व्यवसायिक कारक पुरुषों के अंडकोष के काम करने की क्षमता को प्रभावित करते हैं। पुरुषों ने इस अध्ययन में अपने काम और दिन में अपने ब्यौरे को दर्ज कराया। इसमें काम करने के दौरान लगने वाली शारीरिक ताकतका स्तर और भारी-भरकम चीजों को उठाने से जुड़ी जानकारियां भी शामिल थीं।

क्या निकला निष्कर्ष

अध्ययन में पाया गया कि वे पुरुष, जो नियमित रूप से भारी-भरकम सामान या वस्तु उठाते हैं उनमें स्पर्म कंसनट्रेशन 46 फीसदी ज्यादा था। वहीं जिन्होंने अपने जीवन में कभी भी भारी-भरकम वस्तु नहीं उठाई उनकी तुलना में भी 44 फीसदी कुल स्पर्म काउंट ज्यादापाया गया।

इन लोगों में ज्यादा टेस्टोस्टेरोन

वैज्ञानिकों ने ये भी पता लगाया कि वे पुरुष, जो काम के दौरान हेवी और सामान्य लेवल की शारीरिक मेहनत करते हैं उनमें टेस्टेस्टेरोन कंसनट्रेशन हल्की-फुल्की शारीरिक मेहनत वाले लोगों की तुलना में ज्यादा होता है।

दिन-रात की शिफ्ट वाले लोग भी जानें

स्टडी में ये भी पाया गया कि वे पुरुष, जो रात की शिफ्ट में काम करते हैं या फिर रोटेशन वाली शिफ्ट में काम करते हैं उनमें टेस्टोस्टेरोन और एस्ट्रोजन कंसनट्रेशन क्रमश 24 फीसदी और 45 फीसदी ज्यादा होता है। खासतौर पर उन पुरुषों के मुकाबले , जो सिर्फ दिन में काम करते हैं।

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