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दुनियाभर में ओमिक्रोन वेरिएंट से बढ़े कोरोना के मामलों का असर भारत में तीसरी लहर के रूप में देखने को मिल रहा है और इस बार पहले की तुलना में युवा लोग इसका ज्यादा शिकार हो रहे हैं। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च द्वारा अस्पतालों में किए गए एक सर्वे में इस बात का खुलासा हुआ है। ये डेटा देशभर के 37 अस्पतालों से जुटाया गया है और इस बात की जानकारी आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. बलराम भार्गव ने दी है।
कोविड की तीसरी लहर के दौरान असप्ताल में भर्ती होने वाले रोगियों की औसत उम्र 44 के आस-पास है, जबकि पहले की दोनों लहर के दौरान औसत उम्र 55 रही थी। ये डेटा 16 दिसंबर 2021 से 17 जनवरी 2022 के बीच का है, जिसकी तुलना 15 नवंबर से लेकर 15 दिसंबर तक के आंकड़ों से की गई है।
डॉ. भार्गव ने भारत में तीसरी लहर के दौरान अस्पताल में भर्ती होने वाले लोगों की क्लीनिकल प्रोफाइल के बारे में बताते हुए कहा कि तुलनात्मक रूप से पीड़ित आबादी युवा है लेकिन हैरानी की बात ये है कि ये लोग एक से ज्यादा बीमारियोंसे ग्रस्त हैं। उन्होंने कहा कि इस युवा आबादी में ऐसे बहुत सारे लोग हैं, जो एक या उससे ज्यादा बीमारियों से पीड़ित हैं।
डॉ. भार्गव ने कहा कि 46 फीसदी युवा आबादी को एक या उससे ज्यादा बीमारियां है, खासकर उनमें जो युवा हैं लेकिन इनमें से आधे से ज्यादा लोगों को एक या उससे ज्यादा बीमारियां हैं।
ऐसा माना जा रहा है कि भारत में अब तीसरी लहर घटती दिखाई दे रही है, जो पूर्णतः महामारी की दूसरी लहरसे बिल्कुल अलग है। बता दें कि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान सबसे अधिक मौतें हुई थीं। इसके अलावा भी बहुत से अंतर देखे गए हैं, जिसको सरकारी आंकड़ें भी बयां कर रहे हैं। जैसे डॉक्टर भी ओमिक्रोन मरीजों के बारे में ये बात कह चुके हैं ठीक उसी तरह सरकारी आंकड़े भी ये बात दोहरा रहे हैं कि अस्पताल में भर्ती मरीजों में इस बार सभी लक्षण बहुत कम देखे गए हैं। इन सबमें गले में खराश सबसे प्रमुख लक्षण के रूप में सामने आया है।
1-तीसरी लहर में संक्रमित और अस्पताल में भर्ती मरीजों की औसत आयु पहले की तुलना में 55 साल के बजाए 44 साल रही।
2-पहले जहां 66% मरीज एक या उससे ज्यादा बीमारी से पीड़ित थे वो अब 46% मरीजों में देखा गया।
3-तीसरी लहर के दौरान दवाओं का कम उपयोग देखा गया और मामलों में कम जटिलताएं थीं।