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Written By: Gulshan Kumar | Published : March 28, 2024 10:13 AM IST
Baby dies in Delhi Hospitals
दिल्ली सरकार के 3 बड़े अस्पताल (जीटीबी- गुरु तेग बहादुर, एलबीएस- लाल बहादुर शास्त्री, और डीडीयू- दीनदयाल उपाध्याय) ने एक RTI का जवाब देते हुए जानकारी उपलब्ध कराई है कि बीते 6 साल के समय में इन अस्पतालों में कुल 6204 नवजात बच्चों की मृत्यु हुई है। इन अस्पतालों में शिशु मृत्यु दर के औसत की बात करें तो हर 2 दिन में 5 बच्चों ने इन अस्पतालों में दम तोड़ा है। पीटीआई-भाषा नाम की एक संस्था द्वारा दायर किए सूचना के अधिकार अधिनियम के तरह अलग-अलग आवेदन के माध्यम से यह जानकारी उपलब्ध हो सकी है।
आवेदन कर्ता ने अपने आवेदन के तहत इस बात की जानकारी मांगी थी कि अस्पताल में जनवरी 2017 से जुलाई 2023 के बीच कितने बच्चों ने जन्म लिया। वहीं जन्म लेने वाले बच्चों में से कितने ऐसे बच्चे थे जिनकी मौत हो गई, और इनकी मौत के पीछे क्या कारण रहे? इस आवेदन के तरह 3 अस्पतालों से यही जानकारी मांगी गई जिसमें केवल 1 अस्पताल ने मौत के आंकड़े के साथ कारण भी बताया लेकिन 2 अस्पतालों ने केवल मौत के आंकड़े को ही उपलब्ध कराया।
दिल्ली सरकार के सबसे बड़े अस्पताल एलएनजेपी (लोकनायक जयप्रकाश अस्पताल) से भी आरटीआई के तरह जानकारी मांगी गई, लेकिन इस अस्पताल ने शिशु मृत्यु के आंकड़ों की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई है। हालांकि इस अस्पताल ने बच्चों की जन्म की जानकारी जरूर उपलब्ध कराई है।
2020 के आंकड़ों के अनुसार भारत में शिशु मृत्यु दर 1000 बच्चों पर 28 थी, वहीं शिशु मृत्यु दर के मामले में भारत का स्थान विश्व में 49 वां है। हमारे पड़ोसी देश श्रीलंका, वियतनाम और भूटान की स्थिति शिशु मृत्यु दर में हमसे बेहतर है।
जानकारी के मुताबिक, दिल्ली के 3 सरकारी अस्पतालों में हर माह करीब 78 बच्चों की मौत हुई यानी 2 दिन के भीतर 5 नवजात बच्चों की जीवन लीला इन अस्पतालों में समाप्त हो गई। इस मृत्यु दर के औसत की बात करें तो यह 1000 बच्चों के जन्म पर 29.3 का औसत बनता है। वहीं बात करें दिल्ली सरकार के आंकड़ों के मुताबिक राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में शिशु मृत्यु दर साल 2022 में 23.8 बताई गई गई है।