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दिल के लिए अच्छा होकर भी हार्ट अटैक से नहीं बचा सकता गुड कोलेस्ट्रॉल, जानिए HDL और हार्ट का संबंध

एक नयी स्टडी में कहा गया है कि गुड कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ने का यह मतलब नहीं होता कि उससे हार्ट डिजिजेज का खतरा कम हो जाएगा।

दिल के लिए अच्छा होकर भी हार्ट अटैक से नहीं बचा सकता गुड कोलेस्ट्रॉल, जानिए HDL और हार्ट का संबंध

Written by Sadhna Tiwari |Updated : November 23, 2022 10:54 AM IST

Good Cholesterol And Heart Disease: हेल्दी रहने और हार्ट डिजिजेज से बचने के लिए लोगों को शरीर में गुड कोलेस्ट्रॉल और बैड कोलेस्ट्रॉल का स्तर संतुलित करने की सलाह दी जाती है। इसीलिए, लोग अपनी डाइट और लाइफस्टाइल की मदद से कोशिश करते हैं कि शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल कम हो और गुड कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़े। लेकिन, एक नयी स्टडी में कहा गया है कि गुड कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ने का यह मतलब नहीं होता कि उससे हार्ट डिजिजेज का खतरा कम हो जाएगा। इस स्टडी के अनुसार गुड कोलेस्ट्रॉल या हाई एचडीएल (HDL)  का स्तर अधिक होने से हृदय रोग का खतरा कम नहीं कहा जा सकता। (Good Cholesterol And Heart Disease In Hindi)

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (एनआईएच) समर्थित अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी की पत्रिका में प्रकाशित एक रिसर्च के निष्कर्षों में कहा गया है कि वर्षो पहले यह दावा किया गया था एचडीएल कोलेस्ट्रॉल या गुड कोलेस्ट्रॉल का लो-लेवल वयस्कों के लिए हार्ट अटैक और इससे जुड़ी मौत का रिस्क बढ़ जाता है। लेकिन, नयी स्टडी के अनुसार, यह बात सभी वयस्कों पर लागू नहीं होती है। (Good Cholesterol doesn't minimize the risk of Heart Diseases)

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गुड कोलेस्ट्रॉल नहीं बचाता दिल की बीमारियों से..

ओरेगॉन हेल्थ एंड साइंस यूनिवर्सिटी, पोर्टलैंड में नाइट कार्डियोवैस्कुलर इंस्टीट्यूट में प्रोफेसर नथाली पामीर का कहना है कि, " एचडीएल या गुड कोलेस्ट्रॉल को इससे पहले की सभी स्टडीज मे हार्ट हेल्थ के लिए अच्छा बताया गया था, इस स्टडी का मकसद यही था कि, उसके फायदे और प्रभाव को समझना ही इस स्टडी का मकसद था। स्टडी के दौरान देखा गया कि अलग-अलग समूह के लोगों पर कोलेस्ट्रॉल का प्रभाव भी भिन्न-भिन्न दिखायी देता है। इस स्टडी के परिणामों के अनुसार,

  • लो एचडीएल कोलेस्ट्रॉल के कारण कार्डियोवैस्कुलर बीमारी का खतरा बढ़ जाता है।
  • वहीं, हाई एचडीएल या गुड कोलेस्ट्रॉल का लेवल होने पर भी हृदय संबंधी बीमारियों का रिस्क कम नहीं होता है।

पामीर ने बताया कि, "स्टडी के दौरान पता चला कि कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों का रिस्क और कोलेस्ट्रॉल की उसमें भूमिका को समझने के लिए अभी और रिसर्च करने की जरूरत है। "

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(आईएएनएस)