Don’t Miss Out on the Latest Updates.
Subscribe to Our Newsletter Today!
- लेटेस्ट
- डिज़ीज़
- डाइट
- फिटनेस
- ब्यूटी
- घरेलू नुस्खे
- वीडियो
- पुरुष स्वास्थ्य
- मेंटल हेल्थ
- सेक्सुअल हेल्थ
- फोटो स्टोरी
- आयुष
- पेरेंटिंग
- न्यूज
ग्लोबल वार्मिंग ( Global Warming) बढ़ाने में योगदान देनेवाली ग्रीन हाउस गैसों (Green House Gas) का निर्माण पर्यावरण और मानव जीवन को बुरी तरह प्रभावित करता है। मंगलवार को एक आधिकारिक बयान में बताया गया कि विभिन्न देशों में ग्रीन हाउस गैस की उत्पत्ति को लेकर क्या स्थितियां हैं। इस बयान के अनुसार, ऑस्टिन (टेक्सास), एथेंस (ग्रीस), लिस्बन (पुर्तगाल) और वेनिस (इटली) दुनिया के ऐसे प्रमुख शहर हैं जिन्होंने ग्रीन हाउस गैसों (Green House Gas production) लका सबसे कम उत्सर्जन किया है। एक विश्लेषक ने मंगलवार को यह बयान दिया है। दुनिया के प्रमुख वैज्ञानिकों ने गणना की है कि वैश्विक तापमान की वृद्धि 1.5 डिग्री सेल्सियस पर रोकने के लिए 2020 तक वैश्विक ग्रीनहाउस गैस के उत्सर्जन के निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करना होगा।
सी40 वर्ल्ड मेयर्स सम्मेलन से पहले प्रकाशित विश्लेषण में यह पुष्टि की गई कि दुनिया के 30 सबसे बड़े शहर अब उस महत्वपूर्ण मील के पत्थर पर पहुंच गए हैं। इन शहरों में 5.8 करोड़ शहरी नागरिक रहते हैं।
ये 30 शहर एथेंस, ऑस्टिन, बार्सिलोना, बर्लिन, बोस्टन, शिकागो, कोपेनहेगन, हेडलबर्ग, लिस्बन, लंदन, लॉस एंजेलिस, मेड्रिड, मेलबर्न, मिलान, मोंट्रिएल, न्यू ऑरलीन्स, न्यूयॉर्क सिटी, ओस्लो, पेरिस, फिलाडेल्फिया, पोर्टलैंड, रोम, सैन फ्रांसिस्को, स्टॉकहोम, सिडनी, टोरंटो, वैंकूवर, वेनिस, वारसा और वाशिंगटन डीसी हैं। (Green House Gas measures )
यह भी पढ़ें-
यह तथ्य कि दुनिया के 30 सबसे प्रभावशाली शहर पहले ही अपने ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन के लक्ष्य प्राप्त कर चुके हैं, बताता है कि तीव्र, समतुल्य कम कार्बन ट्रांजिसन संभव है और पहले से ही अच्छी गति में है।
सी40 विश्लेषण बताता है कि उत्सर्जन के शीर्ष स्तर पर पहुंचने पर इन 30 शहरों ने ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन 22 फीसदी तक कम कर दिया है। इस साल के सी40 वर्ल्ड मेयर्स सम्मेलन के मेजबान शहर कोपेनहेगन ने उत्सर्जन 61 प्रतिशत तक कम किया है।फिलहाल सी40 के कुल शहरों में से आधे शहर पहले से ही उत्सर्जन के लक्ष्य को प्राप्त कर चुके हैं।
वैश्विक तापमान के अभी भी बढ़ने के बावजूद शहर इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी को लेकर चल रहे हैं, जिसे अब पूरी दुनिया को अपनाने की जरूरत है। गौरतलब है कि वैश्विक स्तर पर भारत मात्र 1.2 टन प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष ग्रीन गैस का उत्सर्जन करता है।
ग्रीन हाउस गैसों में कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रस ऑक्साइड, मिथेन और ओज़ोन शामिल हैं। हवा में इन गैसों का स्तर बढ़ने से मौसम और पर्यावरण में व्यापक बदलाव हो सकते हैं। ग्लोबल वार्मिंग बढ़ने के लिए ग्रीन हाउस गैसों की बड़ी भूमिका है। ग्लोबल वार्मिंग की वजह से समुद्रों का स्तर बढ़ने, सांस लेने लायक हवा की कमी और मौसम में बदलाव होने का खतरा बताया जाता है। इन सबके चलते मनुष्यों की लाइफ क्वालिटी में बदलाव आ सकते हैं।