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Written By: Agencies | Published : November 21, 2017 3:44 PM IST
गुरुग्राम के फोर्टिस अस्पताल में सात साल की एक लड़की की मौत को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने मंगलवार को कहा कि सरकार ने अस्पताल से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। नड्डा ने कहा कि जरूरी हुआ तो मामले में कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि उनके मंत्रालय ने सभी चिकित्सकीय प्रतिष्ठानों के पंजीकरण व विनियमन के संबंध में सभी राज्यों को पत्र लिखा है, जिससे सुविधाओं व सेवाओं के न्यूनतम मानक को निर्धारित किया जा सके।
डब्ल्यूएचओ सम्मेलन से इतर नड्डा ने कहा, "यह एक बहुत दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने फोर्टिस अस्पताल से एक मेडिकल रिपोर्ट मांगी है और हम इस मामले को देखेंगे व जरूरी हुआ तो कार्रवाई की जाएगी।"
गुरुग्राम के फोर्टिस अस्पताल में डेंगू के इलाज के दौरान सात साल के आद्दा की मौत हो गई। आद्या के माता-पिता को उसके शव को 18 लाख रुपये का भुगतान करने के बाद ले जाने दिया गया।
नड्डा ने मामले के सामने आने के बाद यह टिप्पणी की है। आद्दा के माता-पिता ने आरोप लगाया है कि अस्पताल ने उनकी बेटी को इलाज के दौरान प्रतिक्रियाहीन रहने पर भी तीन दिनों तक वेंटिलेटर पर रखा। लड़की की मौत 14 सितंबर को हुई थी।
नड्डा ने कहा, "कृपया मुझे विवरण दीजिए..हम सभी जरूरी कार्रवाई करेंगे।" जैसे ही यह सूचना वायरल हुई, अस्पताल ने एक बयान जारी कर अपना पक्ष रखा। अस्पताल के अनुसार, आद्दा को गुड़गांव के फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट में एक अन्य निजी अस्पताल से 31अगस्त की सुबह लाया गया था।
बयान में कहा गया, "आद्या को गंभीर डेंगू के साथ भर्ती किया गया था। यह डेंगू शॉक सिंड्रोम में बदल गया। उसे आईवी फ्लूइड व जीवन रक्षक प्रणाली पर रखा गया, क्योंकि उसके प्लेटलेट काउंट में तेजी से गिरावट हो रही थी। उसकी स्थिति बिगड़ रही थी, उसे 48 घंटे के भीतर जीवन रक्षक प्रणाली पर रखा गया।"
बयान में कहा गया, "परिवार को बच्ची की गंभीर स्थिति व इस परिस्थिति में उसके बिगड़ते स्वास्थ्य के बारे में बताया गया। प्रक्रिया के तहत हमने बच्ची के हाल के बारे में परिवार की रोजाना काउंसलिंग की।"
बयान में कहा गया, "परिवार ने 14 सितंबर को मेडिकल सलाह (एलएएमए-मेडिकल सलाह के खिलाफ छुट्टी) के खिलाफ अस्पताल से बच्ची को ले जाने का फैसला किया और उसकी उसी दिन मौत हो गई।" फोर्टिस ने कहा कि सभी मानक मेडिकल प्रोटोकाल का पालन किया गया।
इसमें कहा गया, "बीस पन्नों के बिल का विवरण दिया गया, जिसे परिवार को जाते समय सौंप दिया गया। मरीज का इलाज पिडियाट्रिक आईसीयू में 15 दिनों तक किया गया और उसकी स्थिति भर्ती किए जाने के समय से ही गंभीर होने की वजह से उसे गहन देखभाल की जरूरत थी।"
सौजन्य: IANS Hindi
चित्र स्रोत: Shutterstock