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Written By: Pallavi Kumari | Published : June 6, 2022 12:26 PM IST
भारत में अभी मंकीपॉक्स (monkeypox india) के एक भी मामले की पुष्टि नहीं हुई है हालांकि, अभी तक कई जगहों से लोगों में मंकीपॉक्स के लक्षण दिखने की खबर आई है। ताजा खबर दिल्ली से सटे शहर गाजियाबाद की है जहां एक 5 साल की बच्ची में मंकीपॉक्स के लक्षण (monkeypox symptoms) नजर आए हैं। दरअसल, इस 5 साल की बच्ची में खुजली और रैशेज देखे गए हैं। ऐसे में यहां के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने इस बच्ची का सैंपल इक्ट्ठा किया है और चेस्टिंग के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV, Pune) भेजा है। इस मामले के सामने आए के बाद यूपी का स्वास्थ्य विभाग अब अलर्ट पर है और तमाम जिला अधिकारियो को मंकीपॉक्स से जुड़े हर छोटे-बड़े मामले पर नजर रखने को कहा है। इसके अलावा मंकीपॉक्स को लेकर कुछ बातों का जानना बेहद जरूरी है। क्या आइए जानते हैं।
भारत में अब तक मंकीपॉक्स का कोई मामला सामने नहीं आया है, लेकिन पांच साल के बच्चे के संभावित मामले ने चिंता बढ़ा दी है। इसलिए हमें यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) की बात मानते हुए हर लक्षण पर कड़ी नजर रखनी होगी। साथ ही मंकीपॉक्स के लक्षणों (monkeypox symptoms in hindi) के भी बारे में जानना होगा। जैसे कि
- बुखार
- सिरदर्द
- मांसपेशियों के दर्द
- पीठ दर्द
- लिम्फ नोड्स मे सूजन
- शरीर पर चक्कते या रैशेज
- ठंड लगना
- थकावट
यूके स्वास्थ्य सुरक्षा एजेंसी के अनुसार, मंकीपॉक्स में एक दाने का विकास हो सकता है, जो अक्सर चेहरे पर शुरू होता है, फिर जननांगों सहित शरीर के अन्य भागों में फैल जाता है। दाने बदल सकते हैं और पपड़ी भी बन सकते हैं। ऐसे में एक भी लक्षण को नजरअंदाज ना करें।
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, मंकीपॉक्स के संदिग्ध मामले दिखने पर भी हर किसी की टेस्टिंग बेहद जरूरी है। इसके लिए पोलीमरेज़ चेन रिएक्शन (real-time or conventional polymerase chain reaction ) का उपयोग किया जाता है। इसमें मंकीपॉक्स वायरस के वायरल डीएनए के अनूठे अनुक्रमों का पता लगाने के लिए वास्तविक समय या पारंपरिक पोलीमरेज़ चेन रिएक्शन की जांच होती है जो कि न्यूक्लिक एसिड एम्प्लीफिकेशन टेस्टिंग (एनएएटी) पर आधारित होता है।
इसके अलावा पीसीआर का उपयोग अकेले या जीन सीक्वेंसिंग में किया जा सकता है। इस दौरान घाव का खून लेकर या फिर स्वैब की टेस्टिंग के जरिए इसका पता लगाया जाता है।
मंकीपॉक्स को लेकर कुछ लोगों को खासतौर पर सावधान रहने की जरूरत है। जैसे कि
-कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग जैसे बच्चे और बुजुर्ग
-किसी पुरानी बीमारी के रोगियों में
-संक्रमण वाले देश से आए लोगों में
मंकीपॉक्स के बढ़ते मामलों के मद्देनजर, भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय ने हाल ही में बीमारी के प्रकोप को रोकने के लिए 'मंकीपॉक्स रोग के प्रबंधन पर दिशानिर्देश' जारी किए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक बयान में कहा, भारत में अभी तक मंकीपॉक्स का कोई मामला सामने नहीं आया है। लेकिन बचाव के लिए कुछ दिशानिर्देशों का मानना बेहद जरूरी है। जैसे कि
- सभी नमूनों को संबंधित जिले या राज्य के एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (आईडीएसपी) नेटवर्क के माध्यम से आईसीएमआर-एनआईवी (पुणे) की शीर्ष प्रयोगशाला में भेजा जाएगा।
-नए मामलों की तेजी से पहचान पर जोर देते हैं
- मानव-से-मानव ट्रांसमिशन के जोखिम को कम करने के लिए कुछ उपायों पर ध्यान दें जैसे कि ऐसे किसी भी रोगी को पहले 21 दिनों के लिए आइसोलेट करें और इनसे दूरी बनाएं।
इसके बाद टेस्टिंग के लिए भेजें और बाकी लोग रोगी के संपर्क में थे बहुत ज्यादा सतर्क रहें और इसके हर लक्षणों पर नजर रखें। साथ बच्चों में इसके लक्षण दिखते ही डॉक्टर से संपर्क करें और उनसे उचित सुझाव लें।