गैस रोगियों के लिए हानिकारक हो सकता है इस दवा का सेवन! 21 फीसदी तक बढ़ जाता है हार्ट अटैक का खतरा

एंटासिड का लगातार उपयोग अनियमित धड़कन और धमनियों में प्लाक के निर्माण में मदद करता है और GERD रोगियों में ह्रदय रोगों के खतरे को बढ़ाने का काम करता है।

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Written By: Jitendra Gupta | Published : June 21, 2022 5:37 PM IST

भारत में ह्रदय रोगों के मामलों में लगातार वृद्धि देखने को मिल रही है, जिसकी वजह गतिहीन जीवनशैली और प्रोसेस्ड, पैकेज्ड, तला-भुना जैसे अनहेल्दी फूड्स का अधिक सेवन है। ह्रदय रोगों की बात इसलिए क्योंकि बीते कुछ महीनों से ह्रदय रोगों के कारण बहुत सी हस्तियों ने अपनी जान गंवाई है। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और ह्यूस्टन मेथोडिस्ट के शोधकर्ताओं ने ये पता लगाया है कि वे लोग, जो अक्सर एंटासिड का सेवन करते हैं उनमें हार्ट अटैक का खतरा इस तरह की दवाई न लेने वाले लोगों की तुलना में 21 फीसदी ज्यादा होता है।

बता दें कि एंटासिड का लगातार उपयोग अनियमित धड़कन और धमनियों में प्लाक के निर्माण में मदद करता है और GERD रोगियों में ह्रदय रोगों के खतरे को बढ़ाने का काम करता है।

यहां सबसे ज्यादा परेशान लोग

हाल के कुछ वर्षों के दौरान गैस्ट्रो-ओसियोफैगेल रिफलक्स डिजीज (GERD) के मामलों की संख्या भी बढ़ी है, जिसे एसिडिटी के रूप में भी जाना जाता है। करीब 30 फीसदी भारतीय इस समस्या से परेशान रहते हैं, जिसमें सबसे ज्यादा कोलकाता के रहने वाले हैं। कोलकाता में करीब 38.5 फीसदी लोग इस समस्या से परेशान हैं तो सूरत में सबसे कम 21 फीसदी।

एंटासिड और ह्रदय रोगों के बीच संबंध

अगर आप एसिड रिफलक्स की परेशानी से जूझ रहे हैं तो एंटासिड उन आम दवाओं में से एक है, जिन्हें आप मेडिकल शॉप से खरीदकर खा सकते हैं। इन दवाओं को सुरक्षित माना जाता है लेकिन हाल ही में हुए एक शोध में ये खुलासा हुआ है कि ये ह्रदय रोगों से जुड़ी हुई है।

16 से 21 फीसदी खतरा

एंटासिड में मौजूद सक्रिय घटक एक तरीके की बाधा पैदा करते हैं, जो GERD रोगियों में ह्रदय रोगों का एक साइलेंट कारण हो सकता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि एंटासिड दवाओं का एक रूप, जिसे प्रोटोन पंप इंहीबिटर्स कहा जाता है कई स्वास्थय समस्याओं में ली जाने वाली दवा है। हालांकि इसके प्रयोग को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत है क्योंकि एक अध्ययन में पाया गया है कि वे व्यस्क, जो इस दवा का प्रयोग करते हैं उनमें हार्ट अटैक का खतरा इस तरह की दवाई न लेने वाले लोगों की तुलना में 16 से 21 फीसदी ज्यादा होता है।

क्या होता है शरीर पर प्रभाव

इतना ही नहीं पीपीआई हमारे एंडोथेलियम पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। एंडोथेलियम, हमारी रक्त वहिकाओं की टेफ्लोन जैसी लाइनिंग होती है, जिसे गैस की दवा प्रभावित करती है।

ये दवा हानिकारक

बात करें एसिडिटी, एंटासिड और हार्ट अटैक के बीच संबंध की तो पीपीआई और आमतौर पर ली जाने वाली एंटासिड जैसे पैंटाप्राजोल का नियमित इस्तेमाल कोरोनरी आर्टरी डिजीज के साथ जुड़ा हुआ है। कुछ रिपोर्ट में सामने आया है कि कार्डियक चेस्ट पेन को आमतौर पर लोग एसिडिटी समझ लेते हैं, जो हमारे लिए हानिकारक होता है।

इतना ही नहीं एंटासिड लेने के बाद बहुत से रोगियों को लंबे वक्त तक सीने में जलन रहती है इसलिए उन्हें कार्डियक जांच करानी चाहिए, खासकर तब-जब उन्हें कार्डियक जोखिम कारक दिखाई दे रहे हों।

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