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Written By: Editorial Team | Updated : July 7, 2018 12:15 PM IST
जीन थेरेपी की सहायता से किडनी की कोशिकाओं के नुकसान को ठीक किया जा सकता है। वैज्ञानिकों ने संभावना जाहिर की है कि इससे किडनी के पुराने रोग का इलाज हो सकता है। पुराने किडनी के रोग की पहचान इसके धीरे-धीरे किडनी के काम करने की क्षमता घटने से की जाती है।
शोधकर्ताओं ने पाया है कि एडिनो-से जुड़ा वायरस (एएवी) किडनी में क्षतिग्रस्त कोशिकाओं को आनुवांशिक सामग्री पहुंचा सकता है। एएवी वायरस से जुड़ा हुआ है जो सर्दी-जुकाम के लिए जिम्मेदार होता है।
शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि मधुमेह, उच्च रक्तचाप व दूसरी स्थितियां किडनी की पुरानी बीमारी की वजह से पैदा होती है। ऐसा क्षतिग्रस्त किडनी के शरीर के अतिरिक्त तरल व अपशिष्ट को प्रभावी तौर पर छान नहीं पाने के कारण होता है।
अमेरिका में वाशिंगटन विश्वविद्यालय के किडनी रोग विभाग के बेंजामिन डी. हम्फ्रेस ने कहा, "किडनी की पुरानी बीमारी एक बड़ी व तेजी से बढ़ती समस्या है। दुर्भाग्यपूर्ण रूप से बीते सालों में हमने ज्यादा प्रभावी इस स्थिति के लिए नहीं विकसित की हैं और यह वास्तविकता हमें जीन थेरेपी की खोजने को प्रेरित कर रही है।"
इस शोध का प्रकाशन पत्रिका 'अमेरिकन सोसाइटी ऑफ नेफ्रोलॉजी' में किया गया है। इस दल ने छह एएवी वायरसों का परीक्षण किया। इसमें प्राकृतिक व सिंथेटिक दोनों वायरस शामिल हैं। इनके इस्तेमाल चूहों व स्टेम सेल से विकसित मानव गुर्दे की कोशिकाओं पर किया गया।
स्रोत: IANS Hindi.
चित्रस्रोत: Shutterstock.